टेलीग्राम ग्रुप से चल रहा था खेल, NIA-ATS ने खोला बड़ा नेटवर्क

बिजनौर में सामने आए आगजनी के मामलों की जांच के दौरान एक बड़े सोशल मीडिया आधारित आपराधिक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मार्च–अप्रैल 2026 में हुई लगातार आगजनी की घटनाओं ने पुलिस को शक में डाल दिया, जिसके बाद जांच तेज की गई। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड राजस्थान के जैसलमेर का 29 वर्षीय युवक राजूराम गोदारा है, जो टेलीग्राम के जरिए युवाओं को निर्देश देता था। शुरुआत में लोगों से सोशल मीडिया (Instagram/Facebook) पर संपर्क किया जाता था, फिर उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर टारगेट दिए जाते थे। इस नेटवर्क में हर घटना का वीडियो सबूत के रूप में मांगा जाता था और बदले में पैसे दिए जाते थे, जो ऑनलाइन या हवाला के जरिए भेजे जाते थे। जांच में इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन (सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका तक) की भी आशंका जताई गई है। फिलहाल मामले की जांच NIA और ATS कर रही हैं और पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Editor
April 18, 2026 • 1:36 PM  13
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टेलीग्राम ग्रुप से चल रहा था खेल, NIA-ATS ने खोला बड़ा नेटवर्क
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18 Apr 2026
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टेलीग्राम ग्रुप से चल रहा था खेल, NIA-ATS ने खोला बड़ा नेटवर्क

क्या एक आम सा दिखने वाला युवक इतना बड़ा खेल खेल सकता है? और क्या सोशल मीडिया, जो आज तक सिर्फ चैटिंग, एंटरटेनमेंट और कनेक्शन का जरिया माना जाता था, अब किसी बड़े अपराधी नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर से सामने आया मामला इन्हीं सवालों को और गहरा कर देता है।

आगजनी की घटनाओं से शुरू हुआ शक

मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान बिजनौर जिले के अलग-अलग इलाकों में अचानक आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं। शुरुआत में स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इन्हें सामान्य आपराधिक घटनाएं माना, लेकिन जब एक ही पैटर्न में लगातार वारदातें होने लगीं, तो पुलिस को शक हुआ कि मामला कुछ और गंभीर है।

हर घटना लगभग एक जैसी थी—रात के समय आगजनी, वाहन या संपत्ति को निशाना बनाना और फिर तेजी से मौके से फरार हो जाना। धीरे-धीरे यह साफ होने लगा कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

एक घटना ने खोली जांच की दिशा

4 मार्च की रात किरतपुर इलाके में एक पिकअप वाहन को पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना इस पूरी श्रृंखला की सबसे अहम कड़ी साबित हुई। इसके बाद आसपास के इलाकों में भी इसी तरह की घटनाएं होने लगीं, जिससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।

जांच में राजस्थान तक पहुंचे तार

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इस पूरे मामले की कड़ियां उत्तर प्रदेश से निकलकर राजस्थान तक पहुंच गईं। पुलिस को इनपुट मिला कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग राजस्थान के जैसलमेर में सक्रिय हैं।

इसके बाद नाचना इलाके से पुलिस ने एक 29 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया। शुरुआत में उसने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की और खुद को “सैयद” बताया, लेकिन तकनीकी जांच और पूछताछ के बाद उसकी असली पहचान सामने आई—राजूराम गोदारा।

मास्टरमाइंड की भूमिका का खुलासा

जांच एजेंसियों के मुताबिक, राजूराम गोदारा इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। वह खुद जैसलमेर में बैठकर उत्तर प्रदेश में सक्रिय युवाओं को टेलीग्राम के जरिए निर्देश देता था।

उसका तरीका बेहद संगठित था—कहां जाना है, किस इलाके को टारगेट करना है, किस तरह की घटना करनी है और फिर कैसे वहां से निकलना है, यह सब पहले से तय होता था।

सोशल मीडिया से शुरू होता था जाल

इस नेटवर्क की सबसे खतरनाक बात इसका सोशल मीडिया इस्तेमाल था। पहले Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर युवाओं से संपर्क किया जाता था। धीरे-धीरे उनसे दोस्ती और भरोसा बनाया जाता, फिर उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में शामिल किया जाता था।

यहीं से असली खेल शुरू होता था। ग्रुप में मौजूद हैंडलर्स टारगेट भेजते थे और पूरी योजना समझाते थे। हर काम को पूरा करने के बाद उसका वीडियो बनाकर भेजना जरूरी होता था, जिसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।

पैसे का लालच और “टास्क सिस्टम”

जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में हर काम के बदले पैसे दिए जाते थे। यह सिस्टम पूरी तरह टास्क बेस्ड था—हर काम का अलग रेट तय था।

भुगतान कभी ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए किया जाता था तो कभी हवाला नेटवर्क के माध्यम से। इस तरह यह पूरा सिस्टम एक तरह के कॉन्ट्रैक्ट क्राइम नेटवर्क की तरह काम कर रहा था।

टेक्नोलॉजी का खतरनाक इस्तेमाल

इस पूरे नेटवर्क में आधुनिक तकनीक का भी बेहद सोच-समझकर इस्तेमाल किया जा रहा था। Google Maps से सॉफ्ट टारगेट की पहचान की जाती थी, लाइव लोकेशन के जरिए निगरानी रखी जाती थी और सोशल मीडिया के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी।

यह साफ संकेत देता है कि अपराध अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी अपनी जगह बना चुके हैं।

इंटरनेशनल कनेक्शन की आशंका

जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के तार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं मिले हैं। इसके कनेक्शन सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

करीब 15 से 20 लोग इस नेटवर्क में सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसियां अलर्ट पर

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच NIA और ATS जैसी एजेंसियां कर रही हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।

निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल

यह पूरा मामला एक गंभीर सवाल छोड़ जाता है कि क्या सोशल मीडिया अब सिर्फ जुड़ने का माध्यम है या कुछ लोगों के लिए अपराध का नया रास्ता बनता जा रहा है?

और क्या आज का युवा, जो डिजिटल दुनिया में लगातार एक्टिव है, ऐसे नेटवर्क की सच्चाई को समय रहते समझ पा रहा है?

क्योंकि अब खतरे सिर्फ बाहर नहीं हैं… कई बार वो हमारे मोबाइल स्क्रीन के अंदर भी छिपे होते हैं।

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