भारत में ऑटोनॉमस ड्राइविंग को मिली नई रफ्तार, ड्राइवरलेस वाहनों की टेस्टिंग और सुरक्षा तकनीकों को मंजूरी

भारत सरकार ने ऑटोनॉमस (ड्राइवरलेस) वाहनों की सुरक्षा तकनीकों और टेस्टिंग को मंजूरी देकर स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस पहल से सड़क सुरक्षा में सुधार, ऑटोमोबाइल उद्योग में नवाचार और भविष्य की परिवहन तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 14, 2026 • 11:23 AM  7
भ
भारत
NEWS CARD
Logo
भारत में ऑटोनॉमस ड्राइविंग को मिली नई रफ्तार, ड्राइवरलेस वाहनों की टेस्टिंग और सुरक्षा तकनीकों को मंजूरी
“भारत में ऑटोनॉमस ड्राइविंग को मिली नई रफ्तार, ड्राइवरलेस वाहनों की टेस्टिंग और सुरक्षा तकनीकों को मंजूरी”
Favicon
Read more onthekhatak.com/s/070656
14 Jun 2026
https://thekhatak.com/s/070656
Google News
Copied
भारत में ऑटोनॉमस ड्राइविंग को मिली नई रफ्तार, ड्राइवरलेस वाहनों की टेस्टिंग और सुरक्षा तकनीकों को मंजूरी

भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, कनेक्टेड कारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीचर्स के बाद अब ऑटोनॉमस ड्राइविंग (Autonomous Driving) यानी ड्राइवरलेस वाहन तकनीक भी देश में चर्चा का केंद्र बन रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार ने ऑटोनॉमस वाहनों से जुड़ी सुरक्षा तकनीकों और उनके परीक्षण (Testing) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को भारतीय परिवहन व्यवस्था के भविष्य के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी?

ऑटोनॉमस ड्राइविंग ऐसी तकनीक है जिसमें वाहन सेंसर, कैमरा, रडार, लिडार (LiDAR), जीपीएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बिना मानव हस्तक्षेप के सड़क पर चल सकते हैं। यह सिस्टम सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों को पहचानकर स्वतः निर्णय लेने में सक्षम होता है। वाहन सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने और यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सरकार की मंजूरी का क्या मतलब है?

सरकार द्वारा दी गई मंजूरी का उद्देश्य ऑटोनॉमस तकनीकों के विकास और परीक्षण को बढ़ावा देना है। इसके तहत वाहन निर्माता कंपनियां और तकनीकी संस्थान नियंत्रित परिस्थितियों में ड्राइवरलेस तकनीकों का परीक्षण कर सकेंगे। साथ ही सुरक्षा मानकों, डेटा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा से जुड़े नियमों को भी मजबूत किया जाएगा। इस कदम से भारतीय और वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों को देश में नई तकनीकों के विकास और निवेश का अवसर मिलेगा।

सड़क सुरक्षा में होगा सुधार

विश्व स्तर पर अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं मानवीय गलतियों के कारण होती हैं। ऑटोनॉमस तकनीक इन गलतियों को कम करने में मदद कर सकती है। एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीपिंग असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल और 360-डिग्री मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें पहले से ही आधुनिक वाहनों में उपयोग की जा रही हैं। ड्राइवरलेस तकनीक इन्हीं सिस्टम्स को और अधिक उन्नत बनाकर वाहन को स्वयं निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।

भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को मिलेगा फायदा

ऑटोनॉमस तकनीक को मंजूरी मिलने से भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे ऑटोमोबाइल कंपनियों, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी डेवलपर्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ऑटोनॉमस मोबिलिटी बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि भारत में ड्राइवरलेस वाहनों के लिए सड़क संरचना, ट्रैफिक पैटर्न, मौसम की विविध परिस्थितियां और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। इसलिए तकनीक को पूरी तरह लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और मजबूत नियमों की आवश्यकता होगी।

भारत सरकार की यह पहल देश को स्मार्ट मोबिलिटी और भविष्य की परिवहन तकनीकों की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक न केवल यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में नवाचार और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगी।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

Digital Archives

homeHomeamp_storiesWeb Storieslocal_fire_departmentTrendingplay_circleVideosmark_email_unreadNewsletter