नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जारी किया नोटिस, ईडी की याचिका पर मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की याचिका पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। ईडी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें 16 दिसंबर 2025 को ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक की मांग पर भी नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 तय की है।
नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (22 दिसंबर 2025) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है, जिसमें ईडी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जो उनकी चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने ईडी की मुख्य याचिका के साथ-साथ उस अंतरिम आवेदन पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें 16 दिसंबर 2025 के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 मार्च 2026 तय की है। अब गांधी परिवार और अन्य आरोपियों को ईडी की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
क्या है ट्रायल कोर्ट का विवादित आदेश? 16 दिसंबर 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ईडी की शिकायत कानूनन टिकाऊ नहीं है क्योंकि यह किसी एफआईआर पर आधारित नहीं है। यह मामला भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर आधारित है, न कि पुलिस या किसी जांच एजेंसी की एफआईआर पर। कोर्ट ने हालांकि ईडी को जांच जारी रखने की छूट दी थी। इस फैसले से गांधी परिवार को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन ईडी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत है क्योंकि निजी शिकायत पर कोर्ट द्वारा संज्ञान लेना एफआईआर से भी ऊपर की बात है। उन्होंने कहा कि अगर यह आदेश कायम रहा तो पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) बेकार हो जाएगा।