हैदराबाद के जंगलों का सच: विकास के नाम पर विनाश की चीखें क्यों गूंज रही हैं सोशल मीडिया पर?”

हैदराबाद के जंगलों में बुलडोजरों की गड़गड़ाहट और वन्यजीवों की चीख-पुकार ने सोशल मीडिया को हिला दिया है। 400 एकड़ का हरा-भरा जंगल, जिसे शहर का "फेफड़ा" कहा जाता है, विकास के नाम पर तबाह हो रहा है। वायरल वीडियो में मोरों की करुण पुकार और हिरणों की बेबसी ने लोगों का दिल दहला दिया। क्या है इस विनाश की असली हकीकत? आइए जानते हैं।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
April 6, 2025 • 1:07 PM  9k
भारत
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हैदराबाद के जंगलों का सच: विकास के नाम पर विनाश की चीखें क्यों गूंज रही हैं सोशल मीडिया पर?”
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6 Apr 2025
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हैदराबाद के जंगलों का सच: विकास के नाम पर विनाश की चीखें क्यों गूंज रही हैं सोशल मीडिया पर?”

हैदराबाद, एक शहर जो अपनी निजामी संस्कृति और आधुनिक आईटी हब के लिए मशहूर है, आज एक अलग वजह से चर्चा में है। शहर के पास स्थित 400 एकड़ का घना जंगल, जिसमें पेड़-पौधों की सैकड़ों प्रजातियां और वन्यजीवों का बसेरा है, अब बुलडोजरों की भेंट चढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में रात के अंधेरे में पेड़ों को काटते हुए भारी मशीनें और उनके बीच से आती मोरों की चीखें लोगों के दिलों को छू रही हैं। यह दृश्य न केवल हैदराबाद के पर्यावरण प्रेमियों को परेशान कर रहा है, बल्कि पूरे देश में एक सवाल खड़ा कर रहा है—क्या विकास की कीमत प्रकृति का विनाश है?

#### कहानी की शुरुआत  
यह सब तब शुरू हुआ जब तेलंगाना सरकार ने कथित तौर पर हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पास कांचा गचीबोवली जंगल क्षेत्र को एक विशाल आईटी पार्क में तब्दील करने की योजना बनाई। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से 50,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन इस "सपने" को पूरा करने के लिए जो कदम उठाया गया, उसने जंगल को रातों-रात उजाड़ना शुरू कर दिया। वीडियो में दिख रहा है कि बुलडोजर पेड़ों को गिरा रहे हैं, जबकि हिरण भाग रहे हैं और मोर अपनी आखिरी उम्मीद में चीख रहे हैं। 

#### सोशल मीडिया पर क्यों मचा हंगामा?  
इन वीडियो को सबसे पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने शेयर किया। देखते ही देखते यह क्लिप्स वायरल हो गईं। लोगों ने इसे "विकास का क्रूर चेहरा" करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "यह जंगल हैदराबाद का फेफड़ा है, इसे काटना मतलब शहर को दम घोंटना है।" एक अन्य ने सवाल उठाया, "क्या पैसा पेड़ों से ज्यादा कीमती है?" इन वीडियो की सच्चाई ने लोगों को झकझोर कर रख दिया, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब विकास के नाम पर प्रकृति कुर्बान हुई हो, लेकिन शायद पहली बार इसकी चीखें इतनी साफ सुनाई दीं।

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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