सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: WhatsApp और Meta पर प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कड़ी फटकार, यूजर्स के डेटा शेयरिंग पर बड़ा फैसला आज संभव
सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप और मेटा की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ी फटकार लगाई, इसे "निजी जानकारी की चोरी का शालीन तरीका" बताया और "टेक इट ऑर लीव इट" वाली सहमति को फर्जी करार दिया। अदालत ने कहा कि यूजर्स के डेटा को बिना सच्ची सहमति के शेयर नहीं किया जा सकता, प्राइवेसी मौलिक अधिकार है। ₹213 करोड़ के सीसीआई जुर्माने पर रोक लगाई लेकिन डेटा शेयरिंग पर सख्ती बरती। कंपनी को एफिडेविट जमा करने को कहा। अगर पालन नहीं हुआ तो भारत छोड़ना पड़ सकता है। अंतरिम आदेश आज 9 फरवरी 2026 को संभव, अगली सुनवाई में फैसला।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने Meta Platforms (पूर्व में Facebook) और उसकी स्वामित्व वाली मैसेजिंग ऐप WhatsApp की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी पर तीखी टिप्पणियां की हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि कंपनियां भारतीय नागरिकों के निजता के अधिकार (Right to Privacy) के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकतीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने 3 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में WhatsApp की "take it or leave it" पॉलिसी को "प्राइवेट जानकारी की चोरी का शालीन तरीका" तक करार दिया और चेतावनी दी कि अगर कंपनियां संविधान और प्राइवेसी के नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उन्हें भारत छोड़ना पड़ सकता है।
मुख्य बातें और अदालत की टिप्पणियां
डेटा शेयरिंग पर रोक का संकेत: सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा (मेटाडेटा सहित) को अन्य Meta कंपनियों (जैसे Facebook, Instagram) के साथ बिना सच्ची सहमति के शेयर नहीं कर सकतीं। अदालत ने कहा, "हम एक भी जानकारी शेयर करने की अनुमति नहीं देंगे।" कंपनी को डेटा शेयरिंग न करने का एफिडेविट जमा करने को कहा गया है।