"जयपुर सेंट्रल जेल : कैदियों की मौज-मस्ती और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत का चौंकाने वाला खुलासा"
जयपुर सेंट्रल जेल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां चार कैदियों (रफीक उर्फ बकरी, भंवरलाल यादव, अंकित बंसल, करण गुप्ता) ने बीमारी का बहाना बनाकर जेल से बाहर निकलकर होटलों में ऐय्याशी की। कैदियों ने जेल डॉक्टर से फर्जी मेडिकल रेफरल प्राप्त किया और पुलिसकर्मियों को रिश्वत (लगभग ₹25,000) देकर अस्पताल के बजाय होटलों में गए, जहां वे अपनी प्रेमिकाओं या पत्नियों से मिले और नशीले पदार्थों का सेवन किया। इस घोटाले में जेल प्रशासन, पुलिसकर्मियों और कैदियों के सहयोगियों की मिलीभगत सामने आई है। पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें 5 पुलिसकर्मी, 4 कैदी और 4 रिश्तेदार शामिल हैं। पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, और जेल में अवैध फोन उपयोग और 200 से अधिक कॉल्स की जांच चल रही है। इस घटना ने जेल की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जयपुर सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कैदियों को इलाज के बहाने जेल से बाहर निकालकर होटलों में ऐय्याशी करने का अवसर दिया गया। इस घोटाले में पुलिसकर्मियों, जेल प्रशासन और कैदियों के सहयोगियों की मिलीभगत का गंभीर खुलासा हुआ है, जिसने जेल की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल जेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सजा के लिए बनाई गई जेलें अपराधियों के लिए ऐय्याशी का अड्डा बन रही हैं।
जयपुर सेंट्रल जेल में चार कैदियों—रफीक बकरी, भंवर लाल, अंकित बंसल और करण गुप्ता—को कथित तौर पर इलाज के लिए सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अस्पताल में इलाज कराने के बजाय, ये कैदी होटलों में पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी प्रेमिकाओं, पत्नियों या परिचितों से मुलाकात की, खाना खाया और नशीले पदार्थों का सेवन किया। इस पूरी साजिश में जेल गार्ड, पुलिसकर्मी और कुछ बाहरी लोग शामिल थे।
पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं: