जोधपुर की तापी बावड़ी: खंडहर में तब्दील इतिहास, 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के तहत पुनर्जनन की आस

जोधपुर की ऐतिहासिक तापी बावड़ी, जो कभी गंगा के समान पवित्र जल का स्रोत थी, आज कचरे और उपेक्षा के कारण खंडहर बनती जा रही है। 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत जल संरक्षण की योजना के बावजूद, इस बावड़ी की मरम्मत और सफाई तीन साल से रुकी हुई है। स्थानीय लोग सरकार और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी से परेशान हैं। बावड़ी का पुनर्जनन न केवल जल संरक्षण बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए जरूरी है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 8, 2025 • 3:11 PM  16
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जोधपुर की तापी बावड़ी: खंडहर में तब्दील इतिहास, 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के तहत पुनर्जनन की आस
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8 Jun 2025
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जोधपुर की तापी बावड़ी: खंडहर में तब्दील इतिहास, 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के तहत पुनर्जनन की आस

जोधपुर, राजस्थान का ऐतिहासिक शहर, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन जल संरचनाओं के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक है 403 साल पुरानी तापी बावड़ी, जो कभी इस क्षेत्र की शान थी। यह बावड़ी, जो 1618 में जोधपुर रियासत के दीवान वीर गिरधरजी व्यास के छोटे भाई नाथोजी व्यास ने अपने पिता तापोजी की स्मृति में बनवाई थी, आज खंडहर में तब्दील होती नजर आ रही है। कभी इस बावड़ी का पानी इतना स्वच्छ और पवित्र माना जाता था कि लोग इसे गंगा के जल के समान मानते थे। माना जाता है कि इसका जल स्रोत आज भी रहस्यमय है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि इसका पानी कहाँ से आता है। लेकिन आज यह ऐतिहासिक बावड़ी कचरे और उपेक्षा का शिकार हो चुकी है।

तापी बावड़ी का गौरवशाली इतिहास 

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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