मां की पुकार- "मेरे कलेजे का टुकड़ा लाओ": नेपाल में फंसा पेट्रोल पंप कारोबारी
काठमांडू में हिंसा के कारण फंसे भारतीय कारोबारी पंकज चितारा की सुरक्षित वापसी के लिए परिवार चिंतित, भारत सरकार विशेष विमान भेजने की तैयारी में।
नेपाल की राजधानी काठमांडू में भड़की हिंसा और अशांति ने हजारों विदेशी सैलानियों को संकट में डाल दिया है। इनमें राजस्थान के बाड़मेर जिले के पेट्रोल पंप कारोबारी पंकज चितारा (45) भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा के लिए गए थे। 9 सितंबर को काठमांडू लौटने के बाद त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने से वे पिछले तीन दिनों से एक होटल में फंसे हुए हैं। उनके परिवार का कहना है कि नेपाल में हालात बेहद खराब हैं, और वे अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
मां की आंसुओं भरी अपील: "मेरे बेटे को घर लाओ"
पंकज की मां शीलादेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा, "मेरा कलेजे का टुकड़ा वहां अकेला है। फोन पर उसने बताया कि वह ठीक है, लेकिन वहां दंगे और उपद्रव की स्थिति है। मैं दिन-रात बस यही प्रार्थना कर रही हूं कि मेरा बेटा जल्दी घर लौट आए।" पंकज के रिटायर्ड पिता चंपालाल चितारा ने बताया कि वे बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों से बार-बार संपर्क कर रहे हैं। "हम वीडियो कॉल और फोन पर पंकज से बात करते हैं, लेकिन वहां खाना-पीना भी ठीक से नहीं हो पा रहा। हम चाहते हैं कि सरकार उसे और अन्य सैलानियों को जल्द से जल्द भारत वापस लाए," उन्होंने भावुक होकर कहा।
काठमांडू में अराजकता: हवाई अड्डा बंद, उड़ानें रुकीं
पंकज 24 अगस्त को सदगुरु के ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। 9 सितंबर को दोपहर 2 बजे काठमांडू लौटने के बाद अचानक भड़की हिंसा के कारण हवाई अड्डा बंद कर दिया गया। चंपालाल के अनुसार, "बुधवार को कुछ विमान और हेलिकॉप्टर हवाई अड्डे के आसपास दिखे, लेकिन सिविल उड़ानें शुरू होने की कोई जानकारी नहीं है। टिकट बुक हैं, पर उड़ानें शुरू होने की संभावना कम है।" नेपाल में बिगड़ते हालात के बीच वहां मौजूद भारतीयों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।