संसद में गूँजी खेरवाड़ा कॉलेज की समस्या: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने उठाई शिक्षकों की कमी पर आवाज

उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने संसद में उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। खेरवाड़ा राजकीय बालिका महाविद्यालय में पदों के रिक्त होने से आदिवासी छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने यूजीसी के माध्यम से रिक्त पदों को शीघ्र भरने और केंद्र से विशेष सहायता की मांग की, ताकि युवाओं को गुणवत्ता शिक्षा और रोजगार अवसर मिलें।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 3, 2026 • 12:32 PM  11
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संसद में गूँजी खेरवाड़ा कॉलेज की समस्या: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने उठाई शिक्षकों की कमी पर आवाज
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संसद में गूँजी खेरवाड़ा कॉलेज की समस्या: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने उठाई शिक्षकों की कमी पर आवाज

उदयपुर जिले के खेरवाड़ा इलाके में स्थित राजकीय बालिका महाविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जो छात्राओं की शिक्षा को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। लंबे समय से कई पद रिक्त पड़े होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है, और शैक्षणिक गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने हाल ही में संसद में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने नियम 377 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि यह न केवल शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि देश के युवाओं के रोजगार अवसरों को भी सीमित कर रहा है।सांसद डॉ. रावत ने अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान राजकीय बालिका महाविद्यालय, खेरवाड़ा का दौरा किया, जहां आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं ने उन्हें इस समस्या से अवगत कराया। छात्राओं ने बताया कि शिक्षकों के पदों के रिक्त होने से उनकी दैनिक कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, व्याख्यान नहीं हो पा रहे, और परीक्षा तैयारी में भी कठिनाई आ रही है। डॉ. रावत ने जोर देकर कहा कि यह समस्या सिर्फ एक कॉलेज या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यह व्याप्त है। देश में करोड़ों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें 'अमृत पीढ़ी' के रूप में जाना जा रहा है। इन युवाओं के कौशल विकास, शैक्षणिक समझ और समग्र व्यक्तित्व निर्माण में अनुभवी और स्थायी शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं के भविष्य में रोजगार के अवसर भी कम हो रहे हैं, क्योंकि अपर्याप्त मार्गदर्शन से वे प्रतिस्पर्धी दुनिया में पिछड़ जाते हैं।सांसद डॉ. रावत ने सरकार से मांग की है कि इन रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और साथ ही शिक्षकों की भर्ती से बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के माध्यम से सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जाए, जो राज्य सरकारों को इस समस्या से निपटने में मदद करे। 

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