राहुल गांधी की वो भरोसेमंद नेता जिनका पर्चा कटने से हिला मध्य प्रदेश... जानिए कौन हैं मीनाक्षी नटराजन और क्यों छिड़ा है 'सीट चोरी' का महायुद्ध!
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में उस वक्त भारी ड्रामा हो गया जब रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया। जानिए क्या है पूरा विवाद...
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 10, 2026 • 11:51 AM 11
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राजनीति
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“राहुल गांधी की वो भरोसेमंद नेता जिनका पर्चा कटने से हिला मध्य प्रदेश... जानिए कौन हैं मीनाक्षी नटराजन और क्यों छिड़ा है 'सीट चोरी' का महायुद्ध!”
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव ने अब एक बेहद नाटकीय और आक्रामक राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस को यहाँ उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब रिटर्निंग अधिकारी ने पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द (रिजेक्ट) कर दिया। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कांग्रेस पूरी तरह से भड़क गई है और उसने बीजेपी पर सीधे 'लोकतंत्र की हत्या' और 'सीट चोरी' करने का आरोप लगाया है।
दरअसल, इस राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारकर पहले ही सस्पेंस बढ़ा दिया था, और अब कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होने से सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन? राहुल गांधी की 'OG टीम' की सदस्य
मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की कोई आम नेता नहीं हैं, बल्कि उन्हें राहुल गांधी की कोर टीम (OG टीम) का बेहद खास और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। नटराजन ने अपने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रख दिया था और वे एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
राहुल गांधी का भरोसा: साल 2008 में राहुल गांधी ने उन पर बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें एआईसीसी (AICC) का सचिव बनाकर केंद्रीय राजनीति के मुख्य सर्कल में शामिल किया था।
मंदसौर में ढहाया था बीजेपी का किला: साल 2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने जिन युवा चेहरों को मैदान में उतारा था, उनमें मीनाक्षी नटराजन प्रमुख थीं। उन्होंने मध्य प्रदेश की मंदसौर सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी—एक ऐसी सीट जिसे कांग्रेस लगातार छह बार बीजेपी से हार चुकी थी। हालांकि, इसके बाद 2014 और 2019 के चुनावों में उन्हें बीजेपी के सुधीर गुप्ता से हार का सामना करना पड़ा था।
तेलंगाना की बड़ी जिम्मेदारी: कांग्रेस आलाकमान में उनका कद कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फरवरी 2025 में उन्हें एआईसीसी (AICC) तेलंगाना का प्रभारी बनाया गया था।
आखिर क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
यह पूरा एक्शन बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की एक शिकायत के बाद हुआ है। महेश केवट के वकील संकेत गुप्ता के मुताबिक, मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी एफिडेविट (हलफनामे) में एक बेहद जरूरी जानकारी छिपाई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि नटराजन के खिलाफ तेलंगाना में एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसका जिक्र उन्होंने अपने नामांकन पत्र में नहीं किया था। इसी आधार को सही मानते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन खारिज करने का फैसला सुनाया।
'हमारे वकीलों की दलीलें तक नहीं सुनी गईं'— मीनाक्षी नटराजन
नामांकन रद्द होने के बाद अपना गुस्सा जाहिर करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने कहा:
"यह बीजेपी द्वारा लोकतंत्र और संविधान को कुचलने का सीधा प्रयास है। जब से बीजेपी ने अपना तीसरा उम्मीदवार उतारा है, तभी से यह सब खेल शुरू हुआ है। यह सीधे-सीधे सीट चोरी का मामला है और हमारे वकीलों की दलीलों को सुना तक नहीं गया।"
कांग्रेस आलाकमान ने खोला मोर्चा, केसी वेणुगोपाल की बड़ी चेतावनी
इस मामले को लेकर दिल्ली से लेकर भोपाल तक कांग्रेस आक्रामक मोड में आ गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनके नेताओं को 40 मिनट तक इंतजार करवाया और मामले की फिजिकल सुनवाई तक नहीं होने दी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा: "यह देश में लोकतंत्र की हत्या का एक स्पष्ट उदाहरण है। अगर चुनाव आयोग में थोड़ी भी निष्पक्षता बची है, तो उन्हें तुरंत इसमें दखल देना चाहिए। हम बुधवार सुबह तक उनके समय देने का इंतजार कर रहे हैं, अगर न्याय नहीं मिला तो हम सुप्रीम कोर्ट समेत सभी कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे।"
कांग्रेस का साफ कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई मामला दर्ज ही नहीं है और सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर उनका पर्चा गलत तरीके से खारिज किया गया है। अब देखना यह होगा कि क्या चुनाव आयोग इस पर कोई यू-टर्न लेता है या कांग्रेस को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
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