ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाएगी नई तकनीक

मृदुल भटनागर और वर्णाली शर्मा ने ध्वनि प्रदूषण मापने वाली क्लाउड-बेस्ड डिवाइस विकसित की, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है। यह रियल-टाइम में शोर के स्रोत और तीव्रता की निगरानी कर स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 16, 2025 • 1:07 PM  14
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ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाएगी नई तकनीक
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16 Aug 2025
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ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाएगी नई तकनीक

राजस्थान की राजधानी जयपुर ने एक बार फिर तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपनी धाक जमाई है। यहां के मृदुल भटनागर और वर्णाली शर्मा, जो अब पति-पत्नी हैं, ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक अनूठी डिवाइस विकसित की है। इस डिवाइस को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है, जो न केवल शोर के स्रोत और उसकी तीव्रता को सटीक रूप से पहचानता है, बल्कि रियल-टाइम डेटा के जरिए अधिकारियों को निगरानी की सुविधा भी देता है। यह तकनीक शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में शोर के स्तर को नियंत्रित करने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

एक स्टार्टअप से शुरू हुआ सफर

मृदुल और वर्णाली की यह कहानी 2015 में शुरू हुई, जब दोनों ने बीटेक की पढ़ाई के दौरान एक स्टार्टअप की नींव रखी। 2017 में एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने इस डिवाइस पर काम शुरू किया। मृदुल ने बताया, "हम दोनों को हमेशा से कुछ ऐसा करने की चाह थी, जो समाज के लिए उपयोगी हो। ध्वनि प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जो न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता पर भी असर डालती है।"

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