सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका खारिज की, वोटर लिस्ट विवाद में नहीं होगी कोई कार्रवाई

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ 1980 की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के आरोप वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें दावा किया गया था कि वे 1983 में भारत की नागरिक बनीं। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की मांग को आधारहीन बताते हुए कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
September 11, 2025 • 6:19 PM  17
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सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका खारिज की, वोटर लिस्ट विवाद में नहीं होगी कोई कार्रवाई
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11 Sep 2025
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सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका खारिज की, वोटर लिस्ट विवाद में नहीं होगी कोई कार्रवाई

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ 1980 की वोटर लिस्ट से जुड़े एक मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने इस मामले में कोई कार्रवाई करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने 10 सितंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

याचिका में क्या थी शिकायत?

यह याचिका विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था, जबकि उस समय वे भारत की नागरिक नहीं थीं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल की थी और इसके लिए उन्होंने अप्रैल 1983 में आवेदन दिया था। याचिका में यह भी कहा गया कि 1980 में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए संभवतः फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जो एक गंभीर अपराध है।

वोटर लिस्ट में नाम हटाने और जोड़ने का दावा

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि सोनिया गांधी का नाम 1982 में वोटर लिस्ट से हटाया गया था और बाद में 1983 में फिर से जोड़ा गया। याचिका में मांग की गई थी कि इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में न तो सोनिया गांधी को कोई नोटिस जारी किया और न ही दिल्ली पुलिस को कोई निर्देश दिया।

कोर्ट का फैसला: याचिका में नहीं मिला दम

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका की सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में याचिकाकर्ता के दावों को पर्याप्त आधारहीन माना और कोई कानूनी कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं समझी। इस फैसले के साथ ही इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ किसी भी तरह की जांच या एफआईआर की मांग को खारिज कर दिया गया।

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