पत्रकारिता की आड़ में कांग्रेस की खिदमत : राजस्थान का खुला रहस्य

राजस्थान में एक गिरोह पत्रकारिता की आड़ में कांग्रेस की गोद में बैठकर 2018-23 तक सरकारी विज्ञापन और टेंडर की मलाई खाता रहा। 2023 में भाजपा की सरकार आते ही यही “निष्पक्ष पत्रकार” रातोंरात कांग्रेस प्रवक्ता बन गए। अब हर रोज फर्जी खुलासे, झूठी खबरें और जोजरी नदी जैसे मुद्दों पर बिना तथ्य जांचे प्रोपेगेंडा चल रहा है। जनता इनकी पोल खोल चुकी है और इनकी विश्वसनीयता का अंतिम संस्कार शुरू हो गया है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
November 30, 2025 • 4:39 PM  139
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30 Nov 2025
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पत्रकारिता की आड़ में कांग्रेस की खिदमत : राजस्थान का खुला रहस्य

राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो खुद को “पत्रकार” कहलवाना पसंद करता है, लेकिन असल में कांग्रेस पार्टी का अनौपचारिक प्रचार-तंत्र चलाता है। यह कोई नई कहानी नहीं है। 2018 से 2023 तक कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने जिस बेशर्म तरीके से सरकारी खजाने का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा “पाले-पोसे” पत्रकारों और सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को खुश करने में किया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।

2018-2023 : विज्ञापन, टेंडर और पीआर फंड की लूट कांग्रेस सरकार ने सरकारी विज्ञापनों का एक बड़ा हिस्सा कुछ खास न्यूज पोर्टल्स, यूट्यूब चैनलों और फेसबुक पेजों को देना शुरू किया। ये वे ही माध्यम थे जिनके मालिक/एंकर दिन-रात “गहलोत मॉडल” की जय-जयकार करते थे। साथ ही “इन्फ्लुएंसर टेंडर” नाम का एक नया खेल शुरू हुआ। लाखों-करोड़ों के टेंडर बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के इन्हीं “वफादारों” को मिलते थे। पीआर एजेंसियों के नाम पर भी भारी-भरकम रकम इनके खातों में जाती थी। बदले में इनसे क्या अपेक्षा थी? पेपर लीक घोटालों पर खामोशी  रीट, पटवारी, आरएएस जैसे भर्ती घोटालों को “तकनीकी खामी” बताना ,हर सरकारी योजना को “विश्व स्तरीय” और “क्रांतिकारी” बताना ,भाजपा और वसुंधरा राजे को हर खबर में गाली देना और इन महानुभावों ने पूरा-पूरा “वचन निभाया”।

2023 का भूचाल : खजाने का दरवाजा बंद, मुँह का रंग बदला दिसंबर 2023 में जैसे ही भाजपा की सरकार बनी, सरकारी विज्ञापन बंद हुए, टेंडर रुक गए, पीआर फंड सूख गया। अगले ही दिन ये सारे “निष्पक्ष पत्रकार” रातोंरात कांग्रेस के प्रवक्ता बन गए। अब इनके यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज और न्यूज पोर्टल पर रोज सुबह कांग्रेस वॉर-रूम से आई स्क्रिप्ट “ब्रेकिंग न्यूज” बनकर आती है। तथ्यों की जांच? कभी नहीं। स्रोत? “विश्वसनीय सूत्र” या “कांग्रेस का हैंडल”। 

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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