राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की: बच्चा मां और जैविक पिता के साथ होने पर अवैध हिरासत नहीं बनती, पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाई

अलवर के एक पति ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का अपने जीजा के साथ अवैध संबंध है, जिससे पत्नी ने छिपकर बच्चे को जन्म दिया और बच्चे को अवैध हिरासत में रखा है। अदालत ने कहा कि पति खुद मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है, और यदि बच्चा अपनी मां व जैविक पिता के साथ है तो अवैध हिरासत का मामला नहीं बनता। कोई ठोस सबूत न होने और याचिका को कोर्ट प्रक्रिया का दुरुपयोग बताकर पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाते हुए याचिका खारिज कर दी गई। पुलिस जांच में भी बच्चे के जन्म पर संदेह जताया गया था।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
February 25, 2026 • 2:32 PM  4.1k
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राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की: बच्चा मां और जैविक पिता के साथ होने पर अवैध हिरासत नहीं बनती, पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाई
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25 Feb 2026
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राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की: बच्चा मां और जैविक पिता के साथ होने पर अवैध हिरासत नहीं बनती, पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाई

अलवर (राजस्थान) के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी का अपने जीजा के साथ अवैध संबंध हैं, जिसके चलते पत्नी ने छिपकर बच्चे को जन्म दिया और बच्चे को अवैध हिरासत में रखा हुआ है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है, तो अवैध हिरासत का कोई मामला नहीं बनता, खासकर जब याचिकाकर्ता पति खुद मान रहा है कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि

अलवर निवासी इस पति ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी मई 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही है। पति का आरोप था कि पत्नी का जीजा के साथ अवैध संबंध हैं, और इसी संबंध से पत्नी ने अपनी पहचान छिपाकर किसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है। पति ने बच्चे को "अवैध हिरासत" में रखे जाने का आरोप लगाते हुए बच्चे की जान को खतरा बताया और बच्चे की सुरक्षा के लिए गृह सचिव, एडीजी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग), एसपी अलवर तथा संबंधित थानाधिकारी को निर्देश देने की मांग की।

निचली अदालत में पहले भी याचिका खारिज

यह पहली बार नहीं था जब पति ने बच्चे की बरामदगी के लिए अदालत का रुख किया था। इससे पहले उन्होंने अलवर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-3 के समक्ष परिवाद दायर किया था, जिसमें बच्चे की बरामदगी की प्रार्थना की गई थी। उसी परिवाद में पति ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि बच्चा उसका नहीं है, क्योंकि अवैध संबंधों से जन्म हुआ है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट की सुनवाई और टिप्पणियां

याचिका की सुनवाई जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने की। अदालत ने पाया कि याचिका में कोई ऐसा ठोस तथ्य या सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि बच्चा वास्तव में अवैध हिरासत में है। अदालत ने कहा, "यदि बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है, और याचिकाकर्ता (पति) खुद मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है, तो अवैध हिरासत का कोई आधार नहीं बनता।"

अदालत ने आगे टिप्पणी की कि यह याचिका न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के इरादे से दायर की गई प्रतीत होती है। इसलिए इसे हर्जाने (कोस्ट) के साथ खारिज किया जाना उचित है। परिणामस्वरूप, पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाई गई।

पुलिस जांच रिपोर्ट में बच्चे के जन्म पर संदेह

मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने दो जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थीं, लेकिन दोनों रिपोर्टों से बच्चे के जन्म को लेकर संदेह ही जताया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रकाश ठाकुरिया ने हाईकोर्ट में दलील दी कि: पुलिस की पहली रिपोर्ट में महिला ने बच्चे के जन्म से इनकार किया था, लेकिन पड़ोसियों ने बच्चा पैदा होने की बात कही थी।दूसरी रिपोर्ट में पुलिस ने माना कि पत्नी ने दूसरे नाम से अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था।लेकिन पत्नी अब भी इनकार कर रही है, तो अस्पताल रिकॉर्ड में दर्ज बच्चा आखिर गया कहां?अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने उनके तथ्यों को ठीक से नहीं समझा, इसलिए वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बना रहे हैं।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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