राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की: बच्चा मां और जैविक पिता के साथ होने पर अवैध हिरासत नहीं बनती, पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाई
अलवर के एक पति ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का अपने जीजा के साथ अवैध संबंध है, जिससे पत्नी ने छिपकर बच्चे को जन्म दिया और बच्चे को अवैध हिरासत में रखा है। अदालत ने कहा कि पति खुद मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है, और यदि बच्चा अपनी मां व जैविक पिता के साथ है तो अवैध हिरासत का मामला नहीं बनता। कोई ठोस सबूत न होने और याचिका को कोर्ट प्रक्रिया का दुरुपयोग बताकर पति पर 50 हजार रुपये की कोस्ट लगाते हुए याचिका खारिज कर दी गई। पुलिस जांच में भी बच्चे के जन्म पर संदेह जताया गया था।
अलवर (राजस्थान) के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी का अपने जीजा के साथ अवैध संबंध हैं, जिसके चलते पत्नी ने छिपकर बच्चे को जन्म दिया और बच्चे को अवैध हिरासत में रखा हुआ है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है, तो अवैध हिरासत का कोई मामला नहीं बनता, खासकर जब याचिकाकर्ता पति खुद मान रहा है कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
अलवर निवासी इस पति ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी मई 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही है। पति का आरोप था कि पत्नी का जीजा के साथ अवैध संबंध हैं, और इसी संबंध से पत्नी ने अपनी पहचान छिपाकर किसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है। पति ने बच्चे को "अवैध हिरासत" में रखे जाने का आरोप लगाते हुए बच्चे की जान को खतरा बताया और बच्चे की सुरक्षा के लिए गृह सचिव, एडीजी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग), एसपी अलवर तथा संबंधित थानाधिकारी को निर्देश देने की मांग की।