15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव नहीं हुए तो सरकार पर अवमानना का खतरा, राज्य निर्वाचन आयोग की सख्त चेतावनी...

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है। आयोग ने कहा है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव नहीं कराए गए तो अदालत की अवमानना के लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। आयोग की ओर से चुनाव की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन वार्ड आरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हो पा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की समय सीमा यथावत रखी है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 13, 2026 • 11:13 AM  1.4k
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15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव नहीं हुए तो सरकार पर अवमानना का खतरा, राज्य निर्वाचन आयोग की सख्त चेतावनी...
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13 Mar 2026
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15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव नहीं हुए तो सरकार पर अवमानना का खतरा, राज्य निर्वाचन आयोग की सख्त चेतावनी...

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में देरी को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव नहीं कराए गए तो अदालत की अवमानना के लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इस संबंध में आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है।

चुनाव में देरी पर आयोग ने जताई नाराजगी

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि पंचायत चुनाव को लेकर अदालत ने पहले ही तय समय सीमा निर्धारित कर दी है। इसके बावजूद पंचायती राज विभाग की ओर से वार्ड आरक्षण से जुड़ी जानकारी आयोग को उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा में देरी हो रही है। आयोग ने साफ कहा कि यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी सरकार के संबंधित अधिकारियों की होगी।

चुनाव की लगभग सभी तैयारियां पूरी

आयोग के अनुसार पंचायत चुनाव कराने के लिए उसकी ओर से लगभग सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। मतदाता सूची 25 फरवरी तक अंतिम रूप से प्रकाशित की जा चुकी है। इसके अलावा ईवीएम और बैलेट बॉक्स की व्यवस्था भी कर ली गई है। चुनाव ड्यूटी में लगने वाले कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी है और मतदान केंद्रों से जुड़ी व्यवस्थाएं भी तैयार हैं। अब केवल राज्य सरकार से वार्ड आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

ओबीसी आरक्षण नहीं होने पर भी कराए जा सकते हैं चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो भी चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार ऐसी स्थिति में ओबीसी के लिए प्रस्तावित सीटों को सामान्य श्रेणी मानकर चुनाव कराए जा सकते हैं। इसी आधार पर आयोग ने सरकार को विकल्प सुझाया है ताकि चुनाव समय पर कराए जा सकें।

एससी-एसटी के लिए सीटें तय करना सरकार के हाथ में

आयोग ने यह भी कहा है कि भले ही ओबीसी सीटों का निर्धारण आयोग की सिफारिश से होना है, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण राज्य सरकार कर सकती है। यदि सरकार इन सीटों की सूची जारी कर देती है तो बाकी पदों को सामान्य श्रेणी में अधिसूचित कर चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश का हवाला

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में बताया कि हाईकोर्ट ने शीला कुमारी बनाम राज्य सरकार मामले में स्पष्ट आदेश दिया था कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी की जाए। इसके बावजूद आयोग को अभी तक वार्ड आरक्षण से जुड़ी जानकारी नहीं मिली है। आयोग ने कहा कि यदि इस कारण चुनाव में देरी होती है तो यह अदालत के आदेश की अवमानना मानी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को रखा बरकरार

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बिहारीलाल रणवा और अन्य की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव से जुड़ा यह मामला उचित मंच पर ही उठाया जाना चाहिए और फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश लागू रहेंगे।

अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर

राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर अब सबकी नजर राज्य सरकार पर टिकी हुई है। यदि सरकार जल्द वार्ड आरक्षण से संबंधित रिपोर्ट जारी कर देती है तो चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकता है। लेकिन अगर इसमें और देरी होती है तो सरकार और संबंधित अधिकारियों को अदालत की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है।

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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