खांसने की आवाज से एआई करेगा लेटेंट टीबी का पता: राजस्थान के 37 जिलों में अक्टूबर से ऐप-आधारित जांच शुरू

अक्टूबर से राजस्थान के 37 जिलों में खांसने की आवाज से लेटेंट टीबी का पता लगाने वाला एआई-आधारित मोबाइल ऐप शुरू होगा। यह सुविधा सब-सेंटरों पर उपलब्ध होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी जांच तेज और सस्ती होगी।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 22, 2025 • 1:39 PM  290
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खांसने की आवाज से एआई करेगा लेटेंट टीबी का पता: राजस्थान के 37 जिलों में अक्टूबर से ऐप-आधारित जांच शुरू
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खांसने की आवाज से एआई करेगा लेटेंट टीबी का पता: राजस्थान के 37 जिलों में अक्टूबर से ऐप-आधारित जांच शुरू

टीबी जैसी घातक बीमारी से निपटने के लिए राजस्थान चिकित्सा विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब स्वस्थ लोगों में छिपी हुई (लेटेंट) टीबी का पता लगाने के लिए खांसने की आवाज की रिकॉर्डिंग पर्याप्त होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस मोबाइल ऐप के जरिए यह जांच संभव होगी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सब-सेंटरों पर आसानी से उपलब्ध होगी। जयपुर सहित 37 जिलों में यह नई सुविधा अक्टूबर माह से शुरू हो जाएगी। इससे टीबी के शुरुआती चरण में ही संक्रमण का पता चल सकेगा, जिससे लाखों जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।

लेटेंट टीबी: छिपा खतरा जो लाखों को प्रभावित करता है

टीबी (क्षय रोग) भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, देश में हर साल करीब 10 लाख नए टीबी केस सामने आते हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या लेटेंट टीबी की है, जो बिना लक्षणों के शरीर में छिपी रहती है और कभी भी सक्रिय हो सकती है। पारंपरिक जांच जैसे बलगम परीक्षण, एक्स-रे या सीबीएनएएटी मशीन पर निर्भर रहने से कई मामलों में देरी हो जाती है।

नई तकनीक इस कमी को दूर करेगी। एआई-आधारित ऐप खांसने की आवाज के विश्लेषण से संक्रमण का पता लगाएगा। यह ऐप गूगल के हेल्थ एकॉस्टिक रिप्रेजेंटेशंस (HeAR) मॉडल पर आधारित है, जो ध्वनि तरंगों के पैटर्न को पढ़कर टीबी बैक्टीरिया की मौजूदगी का अनुमान लगाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधि 90% तक सटीक हो सकती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां उन्नत मशीनें उपलब्ध नहीं होतीं।

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