हंसराज की सफलता के बाद गांव में खुशी का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिजन, रिश्तेदार, शिक्षक और ग्रामीण उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हर कोई उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी को युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहा है।
हंसराज का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता शांतपुरी गोस्वामी गुजरात में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वे लकड़ी के हस्तशिल्प कार्य से जुड़े हुए हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पिता की मेहनत और बेटे के समर्पण का ही परिणाम है कि आज हंसराज राजस्थान के टॉपर बनकर सामने आए हैं।
हंसराज ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे तक नियमित पढ़ाई की। साथ ही संस्थान के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
उनकी सफलता उन युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है, जो आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों को अपनी सफलता के रास्ते की बाधा मानते हैं। हंसराज ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने गुरुवार को रीट मेंस शिक्षक भर्ती परीक्षा के लेवल-1 का परिणाम जारी किया। परिणाम पीडीएफ प्रारूप में जारी किया गया है, जिसे अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
परिणाम जारी होने से पहले बोर्ड ने शिक्षक भर्ती में 2000 पद बढ़ाने का फैसला भी लिया। अब लेवल-1 में 5000 की जगह 7000 पदों पर भर्ती की जाएगी। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।
रीट मेंस परीक्षा का आयोजन 17 से 20 जनवरी 2026 के बीच दो पारियों में किया गया था। आंसर-की पर प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद अब अंतिम परिणाम घोषित किया गया है। हंसराज पुरी गोस्वामी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी बड़े सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकतीं।
बाड़मेर जिले के छोटे से गांव देवका के रहने वाले हंसराज पुरी गोस्वामी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने रीट लेवल-1 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) 2025 में पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपने परिवार, गांव और जिले का नाम रोशन किया है।
हंसराज की सफलता के बाद गांव में खुशी का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिजन, रिश्तेदार, शिक्षक और ग्रामीण उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हर कोई उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी को युवाओं के लिए प्रेरणा बता रहा है।
हंसराज का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता शांतपुरी गोस्वामी गुजरात में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वे लकड़ी के हस्तशिल्प कार्य से जुड़े हुए हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पिता की मेहनत और बेटे के समर्पण का ही परिणाम है कि आज हंसराज राजस्थान के टॉपर बनकर सामने आए हैं।
हंसराज ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे तक नियमित पढ़ाई की। साथ ही संस्थान के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
उनकी सफलता उन युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है, जो आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों को अपनी सफलता के रास्ते की बाधा मानते हैं। हंसराज ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
गौरतलब है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने गुरुवार को रीट मेंस शिक्षक भर्ती परीक्षा के लेवल-1 का परिणाम जारी किया। परिणाम पीडीएफ प्रारूप में जारी किया गया है, जिसे अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
परिणाम जारी होने से पहले बोर्ड ने शिक्षक भर्ती में 2000 पद बढ़ाने का फैसला भी लिया। अब लेवल-1 में 5000 की जगह 7000 पदों पर भर्ती की जाएगी। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।
रीट मेंस परीक्षा का आयोजन 17 से 20 जनवरी 2026 के बीच दो पारियों में किया गया था। आंसर-की पर प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के बाद अब अंतिम परिणाम घोषित किया गया है। हंसराज पुरी गोस्वामी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी बड़े सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकतीं।