बाड़मेर की बेटी मंजू का UN शांति मिशन में चयन... जिले की पहली महिला BSF कांस्टेबल अब कांगो में होंगी तैनात

बाड़मेर जिले की बेटी और चवा गांव की बहू मंजू जागिड़ का संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति मिशन के लिए चयन हुआ है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 14, 2026 • 3:03 PM | Barmer 4
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राजस्थान
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बाड़मेर की बेटी मंजू का UN शांति मिशन में चयन... जिले की पहली महिला BSF कांस्टेबल अब कांगो में होंगी तैनात
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बाड़मेर की बेटी मंजू का UN शांति मिशन में चयन... जिले की पहली महिला BSF कांस्टेबल अब कांगो में होंगी तैनात

राजस्थान के बाड़मेर जिले के लिए गर्व की बात है कि जिले की बेटी और चवा गांव की बहू मंजू जागिड़ का चयन संयुक्त राष्ट्र (United Nations) शांति मिशन (UN Peacekeeping Mission) के लिए हुआ है। वह अब अफ्रीकी देश कांगो में शांति स्थापना और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मिशन में अपनी सेवाएं देंगी। मंजू सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 160 सदस्यीय 19वीं टुकड़ी के साथ दिल्ली से कांगो के लिए रवाना हो चुकी हैं।

यह उपलब्धि सिर्फ मंजू और उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बाड़मेर और राजस्थान के लिए गर्व का विषय है। खास बात यह है कि मंजू जागिड़ बाड़मेर जिले की पहली महिला बीएसएफ कांस्टेबल हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सेवाएं देने का अवसर मिला है।

छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी तक का सफर

मंजू जागिड़ का जन्म 7 अगस्त 1990 को बाड़मेर जिले के रामसर उपखंड के खड़ीन सोढ़ों की बस्ती में हुआ था। साधारण परिवार में जन्मी मंजू ने बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखा था।

साल 2008 में उनकी शादी बाड़मेर जिले के चवा गांव निवासी ईश्वरलाल जागिड़ से हुई। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी जिंदा रखा। वर्ष 2009 में उनकी बड़ी बेटी अनुश्री का जन्म हुआ।

सेना की गाड़ियों को देखकर देखा था सपना

मंजू के पति ईश्वरलाल जागिड़ बताते हैं कि शादी के बाद जब भी मंजू सेना की गाड़ियों को देखती थीं, तो अक्सर कहती थीं कि एक दिन वह भी वर्दी पहनकर देश की सेवा करेंगी। यही सपना धीरे-धीरे उनका लक्ष्य बन गया।

उन्होंने सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए लगातार मेहनत की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दूसरे प्रयास में बीएसएफ में मिली सफलता

लगातार मेहनत के बाद दिसंबर 2014 में दूसरे प्रयास में मंजू का चयन बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर हो गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी सेवाएं शुरू कीं।

नौकरी के दौरान भी उन्होंने परिवार और अपने कर्तव्यों के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखा। वर्ष 2017 में उनकी दूसरी बेटी लक्षिता का जन्म हुआ। दो बेटियों की परवरिश और नौकरी की जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

वर्तमान में किशनगंज में हैं तैनात

मंजू जागिड़ वर्तमान में पश्चिम बंगाल के किशनगंज में बीएसएफ की 87वीं (सत्तासीवीं) बटालियन में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं।

वह चार बहनों और एक भाई में चौथे स्थान पर हैं। उनकी बड़ी बेटी अनुश्री 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि छोटी बेटी लक्षिता चौथी कक्षा की छात्रा हैं।

जनवरी 2025 की दिल्ली ऊंट परेड में भी मिली थी पहचान

मंजू जागिड़ ने जनवरी 2025 में आयोजित दिल्ली ऊंट परेड में भी हिस्सा लिया था। इस दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

अब कांगो में निभाएंगी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए रवाना हुई बीएसएफ की 19वीं टुकड़ी में कुल 160 सदस्य शामिल हैं। इनमें 24 महिला जवान भी हैं, जिनमें मंजू जागिड़ का नाम भी शामिल है।

कांगो में तैनाती के दौरान वह संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत सुरक्षा व्यवस्था, नागरिकों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने से जुड़े दायित्व निभाएंगी।

पूरे क्षेत्र के लिए बनीं प्रेरणा

मंजू के पिता मोहन सिंह सुथार शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जबकि उनके पति ईश्वरलाल जागिड़ बढ़ई का कार्य करते हैं।

एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुका है। मंजू जागिड़ ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो छोटे गांव से निकलकर भी दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचा जा सकता है।

उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि मंजू ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे बाड़मेर जिले और राजस्थान का नाम रोशन किया है।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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