राजस्थान में पंचायत चुनाव: लगातार देरी से बढ़ी अनिश्चितता, 15 अप्रैल तक कराना मुश्किल
राजस्थान में पंचायत चुनावों में लगातार देरी हो रही है। हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी के कारण यह मुश्किल लग रहा है। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बताया कि जन आधिकार प्राधिकरण के आंकड़े अपूर्ण हैं—403 पंचायतों में OBC जनसंख्या शून्य दिखाई गई है। आयोग का गठन मई 2025 में हुआ था, जो अब 10 महीने से अधिक हो चुका है और रिपोर्ट अभी लंबित है। इससे OBC के लिए वार्ड आरक्षण तय नहीं हो पा रहा, जिससे चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।
जयपुर: राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में लगातार हो रही देरी अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक अवश्य संपन्न कराए जाएं, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है। मुख्य कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण निर्धारण में आई रुकावट और संबंधित आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी है।
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को एक पत्र लिखकर जानकारी दी है कि जन आधिकार प्राधिकरण (जनाधार प्राधिकरण) द्वारा उपलब्ध कराए गए जनसंख्या आंकड़े अपूर्ण और गलत पाए गए हैं। इस कारण OBC के लिए वार्ड पंच पदों का आरक्षण तय करना संभव नहीं हो पा रहा है।
आयोग ने पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या तथा OBC की जनसंख्या शून्य दर्शाई गई है। यह स्पष्ट रूप से डेटा में गड़बड़ी को इंगित करता है, क्योंकि वास्तविकता में किसी भी ग्राम पंचायत में जनसंख्या शून्य नहीं हो सकती। ऐसे आंकड़ों के आधार पर OBC आरक्षण का निर्धारण नहीं किया जा सकता, जिससे पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।