उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल से APO डॉक्टर अशोक शर्मा ने MLA डांगी की चुप्पी पर सवाल उठाए: "मैं गलत हूं या सही, बताएं क्षेत्र के चारों विधायक"

उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल से समर्पित डॉक्टर अशोक शर्मा को अचानक APO कर दिया गया। ग्रामीणों ने इसे अन्याय बताया और बड़े प्रदर्शन किए। डॉ. शर्मा ने वीडियो जारी कर मावली विधायक पुष्कर लाल डांगी समेत क्षेत्र के सभी विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि लोग उन्हें कांग्रेसी बता रहे हैं, लेकिन डांगी कुछ बोल क्यों नहीं रहे? मामला राजनीतिक बदले की राजनीति का रूप ले चुका है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
December 4, 2025 • 2:21 PM  33
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राजस्थान
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उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल से APO डॉक्टर अशोक शर्मा ने MLA डांगी की चुप्पी पर सवाल उठाए: "मैं गलत हूं या सही, बताएं क्षेत्र के चारों विधायक"
“उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल से APO डॉक्टर अशोक शर्मा ने MLA डांगी की चुप्पी पर सवाल उठाए: "मैं गलत हूं या सही, बताएं क्षेत्र के चारों विधायक"”
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4 Dec 2025
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उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल से APO डॉक्टर अशोक शर्मा ने MLA डांगी की चुप्पी पर सवाल उठाए: "मैं गलत हूं या सही, बताएं क्षेत्र के चारों विधायक"

उदयपुर, 4 दिसंबर 2025: राजस्थान के उदयपुर जिले के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल में लंबे समय से सेवा दे रहे डॉक्टर अशोक शर्मा को राज्य सरकार द्वारा अचानक एपीओ (अटैच्ड टू एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) कर दिए जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। स्थानीय ग्रामीणों, मरीजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच सदमे की लहर दौड़ गई है, जहां डॉक्टर शर्मा को 'भगवान' के रूप में पूजा जाता था। लेकिन अब डॉक्टर शर्मा ने खुद अपनी सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक वीडियो पोस्ट कर क्षेत्र के विधायकों, खासकर मावली से कांग्रेस विधायक पुष्कर लाल डांगी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "लोग मुझ पर कांग्रेस का होने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी ताज्जुब की बात यह है कि मावली के MLA डांगी मुंह पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। उन्होंने कुछ भी नहीं बोला।" डॉक्टर शर्मा ने क्षेत्र के चारों विधायकों से अपील की है कि वे सामने आएं और बताएं कि वे गलत हैं या सही।

घटना का पृष्ठभूमि: एक समर्पित डॉक्टर की कहानी डॉ. अशोक शर्मा 2007 से उदयपुर के बड़गांव सेटेलाइट हॉस्पिटल में तैनात थे। यह अस्पताल ग्रामीण इलाके का एकमात्र प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां दूर-दराज के गांवों से मरीज आते हैं। डॉक्टर शर्मा की लोकप्रियता का राज उनका समर्पण था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जहां कई डॉक्टर लंच के बहाने घंटों गायब हो जाते हैं, वहीं डॉ. शर्मा अपनी टेबल पर ही खाना खाते थे ताकि कोई मरीज इंतजार न करे। उन्होंने कोरोना काल में रात-दिन सेवा की, और 2022 के किसान आंदोलन के दौरान उदयपुर से हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर 90 दिनों तक रहकर किसानों का मुफ्त इलाज किया। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए वे स्वास्थ्य जागरूकता फैलाते थे और डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान भी अस्पताल के बाहर टेबल लगाकर मरीजों का इलाज करते रहे।लेकिन इसी सक्रियता ने उन्हें निशाने पर ले लिया। सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनकी शिकायत चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से की। आरोप लगाया गया कि डॉ. शर्मा 'कांग्रेसी और वामपंथी विचारधारा' के हैं, समय पर नहीं आते और मरीजों का इलाज नहीं करते। भाजपा के शहर स्तर के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर शिकायत की, जिसके बाद 29 नवंबर 2025 को एपीओ का आदेश जारी हो गया। डॉ. शर्मा ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि सरकार दोषी नहीं है, बल्कि कुछ 'प्रभावशाली लोग' ने गलत जानकारी दी। उन्होंने कहा, "मैंने कभी भेदभाव नहीं किया, लेकिन कुछ लोग ऐसा चाहते थे।"

एपीओ आदेश के बाद भावुक माहौल: ग्रामीणों का प्रदर्शन और आंसुओं की बाढ़ 1 दिसंबर 2025 को डॉ. शर्मा का बड़गांव हॉस्पिटल में आखिरी दिन था। सुबह होते ही अस्पताल के बाहर सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इकट्ठा हो गए। मरीज रो पड़े, कई ने उनके पैर पकड़ लिए और विनती की, "डॉक्टर साहब, न जाएं। आप हमारे भगवान हैं।" प्रदर्शनकारियों ने एपीओ आदेश वापस लेने की मांग की और एसडीएम लतिका पालीवाल को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने डॉ. शर्मा का पक्ष सुना, लेकिन कोई तत्काल राहत नहीं मिली।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग महिला कहती नजर आईं, "डॉक्टर साहब ने मेरे पोते को मुफ्त दवा दी, रात को भी फोन पर सलाह देते थे। अब कौन देखेगा हमारा?" एक अन्य ग्रामीण ने बताया, "कोरोना में उन्होंने अपना खाना-पीना छोड़ दिया था। यह आदेश अन्याय है।

MLA डांगी की चुप्पी पर डॉ. शर्मा का सवाल: राजनीतिक साजिश या उदासीनता? डॉ. शर्मा का सबसे तीखा सवाल मावली विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक पुष्कर लाल डांगी पर है, जिनका क्षेत्र बड़गांव को कवर करता है। वीडियो में डॉ. शर्मा ने कहा, "लोग कह रहे हैं कि मैं कांग्रेस का हूं, इसलिए मुझे हटाया गया। लेकिन डांगी जी, आप चुप क्यों हैं? मुंह पर पट्टी बांध ली है? क्या यह राजनीतिक दबाव है?" उन्होंने उदयपुर जिले के चारों विधायकों—मावली (कांग्रेस), मावली ग्रामीण (भाजपा), उदयपुर ग्रामीण (कांग्रेस) और अन्य—से अपील की, "आप बताएं, मैं गलत हूं या सही। अगर गलत हूं, तो सजा दो। लेकिन सही हूं, तो न्याय दो।"यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़गांव मावली विधानसभा का हिस्सा है। विपक्षी नेता अशोक गहलोत और राजकुमार राठौड़ ने भी ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा। एक व्यक्ति ने लिखा, "जनता के प्रति समर्पित डॉ. शर्मा को हटाना शर्मनाक है। CM भजनलाल शर्मा, आदेश वापस लें।" पूर्व CM गहलोत ने कहा, "अच्छे काम करने वालों को सताने का यह रिकॉर्ड बंद हो।"

राजनीतिक रंग: भाजपा की शिकायत से कांग्रेस का हमला

विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत को कांग्रेस 'राजनीतिक बदले' बता रही है। डॉ. शर्मा के किसान आंदोलन में भागीदारी को भाजपा 'विरोधी गतिविधि' मान रही है। चिकित्सा विभाग के सूत्रों के अनुसार, एपीओ का आधिकारिक कारण 'अनियमितताएं' बताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं साझा किया गया। डॉ. शर्मा अब जयपुर एपीओ हैं, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें बड़गांव वापस भेजा जाए।

 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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