बचपन में आँखों की रोशनी खोने के बावजूद मजबूत इरादों और माँ के अटूट सहयोग से रवि राज ने रचा इतिहास: UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब IAS बनकर पूरा करेंगे सपना

बचपन में आँखों की रोशनी खोने वाले बिहार के नवादा जिले के रवि राज ने माँ विभा के अथक सहयोग से UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल की। माँ ने किताबें पढ़कर सुनाईं, नोट्स बनाए और घंटों साथ पढ़ाई की, जिससे यह दृष्टिबाधित युवक पहले BPSC क्रैक करने के बाद अब IAS बनने का सपना पूरा करने जा रहा है। यह मेहनत और ममता की मिसाल है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 7, 2026 • 11:17 AM  77
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बचपन में आँखों की रोशनी खोने के बावजूद मजबूत इरादों और माँ के अटूट सहयोग से रवि राज ने रचा इतिहास: UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब IAS बनकर पूरा करेंगे सपना
“बचपन में आँखों की रोशनी खोने के बावजूद मजबूत इरादों और माँ के अटूट सहयोग से रवि राज ने रचा इतिहास: UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब IAS बनकर पूरा करेंगे सपना”
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7 Mar 2026
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बचपन में आँखों की रोशनी खोने के बावजूद मजबूत इरादों और माँ के अटूट सहयोग से रवि राज ने रचा इतिहास: UPSC में हासिल की 20वीं रैंक, अब IAS बनकर पूरा करेंगे सपना

नवादा, बिहार के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रवि राज (Ravi Raj या Ravi Raaz के नाम से भी चर्चित) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 20वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि रवि बचपन से ही दृष्टिबाधित (visually impaired) हैं और वे ठीक से देख नहीं पाते। उनकी इस सफलता की कहानी मेहनत, लगन और माँ विभा की ममता से जुड़ी हुई है, जो सालों तक उनकी "आँखें" बनी रहीं।

चुनौतियों से भरा बचपन और शिक्षा का सफर

रवि राज बिहार के नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के निवासी हैं। उनके पिता रंजन कुमार सिन्हा एक किसान हैं, जो परिवार की आजीविका चलाते हैं। रवि ने बचपन में ही अपनी आँखों की रोशनी खो दी थी। वे 7 साल की उम्र से धीरे-धीरे दृष्टिबाधित हो गए और बाद में पूरी तरह नेत्रहीन हो गए। ऐसे में पढ़ाई उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। किताबें पढ़ना, नोट्स बनाना या लिखना – सब कुछ असंभव लगता था।

लेकिन यहां उनकी माँ विभा सिन्हा (या विभा) ने कमाल कर दिखाया। विभा ने बेटे के सपनों को अपनी जिम्मेदारी समझा और खुद को उसके सहारे के रूप में समर्पित कर दिया। वे घंटों बैठकर किताबें पढ़कर सुनातीं, नोट्स बनातीं, महत्वपूर्ण हिस्सों को दोहरातीं और यहां तक कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान यूट्यूब लेक्चर्स भी चलाकर सुनातीं। रवि पढ़ते हुए अपनी बातें जोर से बोलते और माँ उन्हें लिखतीं। इस तरह माँ-बेटे की जोड़ी ने रोजाना 10 घंटे से ज्यादा की पढ़ाई का रूटीन बनाया।

पहले BPSC, फिर UPSC की शानदार सफलता

रवि ने अपनी चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी। इससे पहले उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास की थी और राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के पद पर चयनित हुए थे। कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें 69वें BPSC में जिला टॉपर बताया गया है। लेकिन उनका असली सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने UPSC पर फोकस किया।

UPSC की तैयारी में भी माँ विभा का साथ अटूट रहा। दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को परीक्षा में स्क्राइब (लेखक) की सुविधा मिलती है, लेकिन घर पर तैयारी पूरी तरह माँ के सहयोग से हुई। पहले प्रयास में ही उन्होंने UPSC CSE 2025 में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की, जो एक असाधारण उपलब्धि है। इस परीक्षा में कुल 958 उम्मीदवार सफल हुए हैं, और रवि की रैंक ने नवादा जिले को गौरवान्वित कर दिया है।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया

परिणाम घोषित होने के बाद महुली गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार गदगद है और रवि ने मीडिया से बातचीत में अपने माता-पिता को पूरा श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उनकी यह सफलता माँ के बिना संभव नहीं होती। विभा ने बेटे के लिए घरेलू कामों के बीच भी पढ़ाई का समय निकाला और कभी हताश नहीं होने दिया।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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