जैसलमेर में ओरण-गोचर बचाओ आंदोलन: हजारों की मौन रैली, कलेक्ट्रेट पर धरना और मांगों का ज्ञापन

जैसलमेर में ओरण-गोचर भूमि संरक्षण के लिए गड़ीसर से कलेक्ट्रेट तक विशाल जन आक्रोश रैली निकाली गई, जिसमें हजारों लोग, साधु-संत, और विधायक रविंद्र सिंह भाटी शामिल हुए। रैली जनसभा में तब्दील हुई, जहां कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इन जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने और निजी कंपनियों को आवंटन रोकने की मांग की गई।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 26, 2025 • 6:20 PM  167
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जैसलमेर में ओरण-गोचर बचाओ आंदोलन: हजारों की मौन रैली, कलेक्ट्रेट पर धरना और मांगों का ज्ञापन
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जैसलमेर में ओरण-गोचर बचाओ आंदोलन: हजारों की मौन रैली, कलेक्ट्रेट पर धरना और मांगों का ज्ञापन

पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार को एक विशाल जन आक्रोश रैली निकाली गई। गड़ीसर तालाब के चौराहे से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण मौन जुलूस कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहां यह धरना और जनसभा में तब्दील हो गया। हजारों ग्रामीणों, शहरवासियों, पर्यावरण प्रेमियों, किसान संगठनों और साधु-संतों ने इस रैली में हिस्सा लिया, जो ओरण और गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने और निजी कंपनियों को आवंटन रोकने की मांग को लेकर आयोजित की गई थी।

गोरखनाथ सहित कई साधु-संतों ने किया रैली का नेतृत्व

रैली का नेतृत्व ख्याला मठ म्याजलार के गुरु गोरखनाथ सहित कई साधु-संतों ने किया। इसमें शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी, जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी, पूर्व महारावल चैतन्यराज सिंह और जिला प्रमुख प्रतापसिंह सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। रैली गड़ीसर चौराहे से दोपहर 12:20 बजे शंखनाद के साथ शुरू हुई और अमरसागर गेट, हनुमान चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान नारेबाजी और तिरंगा लहराते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को बुलंद किया।

जनसभा में गूंजी ओरण की महत्ता

कलेक्ट्रेट पर पहुंचने के बाद रैली एक जनसभा में बदल गई, जहां मंच पर गुरु गोरखनाथ सहित कई साधु-संत मौजूद थे। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जमीन पर जनता के बीच बैठकर सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "मुझे राजनीति चले या न चले, कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे पास 100 बीघा जमीन है, मैं कमा लूंगा। लेकिन जिन्हें हमने वोट देकर चुना, वे आज हमारी जमीन और संस्कृति का सौदा कर रहे हैं।" भाटी ने ओरण और गोचर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर का आधार बताया।

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