किसान आंदोलन का साया,केंद्र की चुप्पी और जलवायु परिवर्तन की चेतावनी
पंजाब में बाढ़ संकट पर केंद्र सरकार की चुप्पी और जलवायु परिवर्तन के खतरे को लेकर एनएचसीपीएम के सचिव सुखदेव सिंह भूपल ने चिंता जताई। उन्होंने किसान आंदोलन से बदला लेने का आरोप लगाते हुए सामाजिक एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर बल दिया।
नेचर-ह्यूमन सेंट्रिक पीपुल्स मूवमेंट, इंडिया (एनएचसीपीएम) के सचिव सुखदेव सिंह भूपल ने पंजाब में बाढ़ संकट को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त से शुरू हुई बाढ़ ने पंजाब में भारी तबाही मचाई, लेकिन न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी। भूपल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुए भूस्खलन के दौरान केंद्र सरकार ने तुरंत संवेदना व्यक्त की थी और राहत पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए ऐसी कोई पहल नहीं दिखी। उन्होंने इसे केंद्र की पंजाब के प्रति उदासीनता और किसान आंदोलन का बदला लेने की मंशा से जोड़ा।
किसान आंदोलन का साया
भूपल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ किसान आंदोलन की वजह से भेदभाव कर रही है। पंजाब के नेतृत्व में चले इस आंदोलन ने पूरे देश के किसानों को एकजुट किया था, जिसके दबाव में केंद्र को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े। भूपल ने कहा, "केंद्र सरकार उस हार को भूल नहीं पाई और पंजाब के साथ हमेशा खुंदक रखती है।"
पड़ोसी राज्यों और जनता का सहयोग
भूपल ने बताया कि हरियाणा और राजस्थान की जनता पंजाब के लिए राहत सामग्री लेकर मदद के लिए आगे आई है। कई सामाजिक संगठन भी इस संकट में पंजाब के साथ खड़े हैं। हालांकि, उन्होंने हरियाणा और राजस्थान सरकारों पर सवाल उठाए, जो पंजाब से पानी तो लेती हैं, लेकिन इस संकट में कोई ठोस मदद नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, "इन राज्यों को सिर्फ पानी चाहिए, मदद की बारी आने पर ये पीछे हट जाते हैं।"