जोधपुर जेल से गूंजा सोनम वांगचुक का साहसी संकल्प,'न्याय न मिला तो जेल ही मेरा घर, लेह हिंसा की हो पूरी जांच!'

जोधपुर जेल में बंद सोनम वांगचुक ने लेह हिंसा में चार मौतों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कहा, "जब तक न्याय नहीं मिलता, मैं जेल में रहूंगा।" लद्दाख की छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य दर्जे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरे वांगचुक ने शांति और एकता की अपील की, साथ ही मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती दी है, सुनवाई 6 अक्टूबर को। LAB और KDA ने गृह मंत्रालय से बातचीत रद्द कर दी, जब तक मांगें पूरी न हों।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 5, 2025 • 4:53 PM  19
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
जोधपुर जेल से गूंजा सोनम वांगचुक का साहसी संकल्प,'न्याय न मिला तो जेल ही मेरा घर, लेह हिंसा की हो पूरी जांच!'
“जोधपुर जेल से गूंजा सोनम वांगचुक का साहसी संकल्प,'न्याय न मिला तो जेल ही मेरा घर, लेह हिंसा की हो पूरी जांच!'”
Favicon
Read more on thekhatak.com
5 Oct 2025
https://thekhatak.com/sonam-wangchuk-jodhpur-jail-demands-judicial-probe-leh-violence
Google News
Copied
जोधपुर जेल से गूंजा सोनम वांगचुक का साहसी संकल्प,'न्याय न मिला तो जेल ही मेरा घर, लेह हिंसा की हो पूरी जांच!'

जोधपुर, 5 अक्टूबर 2025: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने जोधपुर सेंट्रल जेल की चारदीवारी से बाहर एक ऐसा संदेश दिया है, जो न सिर्फ उनकी दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि पूरे लद्दाख आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। शनिवार को उनके बड़े भाई कात्सेतन दोरजे ले और वकील मुस्तफा हाजी से विशेष अनुमति पर हुई मुलाकात के दौरान वांगचुक ने स्पष्ट कहा- "जब तक लेह में हुई हिंसा की स्वतंत्र न्यायिक जांच का आदेश नहीं होता, मैं जेल में ही रहूंगा।" यह बयान लद्दाख के लोगों की संवैधानिक मांगों को लेकर छिड़े आंदोलन के बीच आया है, जहां 24 सितंबर को प्रदर्शनों के दौरान चार निर्दोषों की जान चली गई थी।

लद्दाख आंदोलन का पृष्ठभूमि: शांतिपूर्ण मांगों से हिंसा तक का सफर

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और संविधान की छठी अनुसूची (जो आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा प्रदान करती है) लागू करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के फैसले ने लद्दाख के स्थानीय निवासियों में असंतोष पैदा कर दिया था। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे संगठनों के नेतृत्व में चले शांतिपूर्ण आंदोलन ने हाल ही में तीव्रता पकड़ ली। सोनम वांगचुक, जो लद्दाख के शिक्षा सुधार और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं, इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे बन चुके थे।लेकिन 24 सितंबर को लेह में हुए बड़े प्रदर्शन के दौरान स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में एक पूर्व सैनिक सहित चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए। हिंसा के तुरंत बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया, जो कई दिनों तक जारी रहा। इसके अलावा, 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया और स्थानीय लोगों ने सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter