महाराष्ट्र का सौंदला गाँव बना देश का पहला ‘जाति मुक्त’ गांव, युवाओं की पहल से लिया ऐतिहासिक संकल्प

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सौंदला गांव ने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर खुद को ‘जाति मुक्त’ घोषित किया है। ग्रामीणों ने सामाजिक जीवन में जातिगत भेदभाव समाप्त करने और मानवता को सर्वोपरि मानने का संकल्प लिया है। गांव में सार्वजनिक स्थान सभी के लिए समान रूप से खुले रहेंगे और जाति सूचक पहचान को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। यह पहल सामाजिक समरसता और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 1, 2026 • 11:21 AM  318
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महाराष्ट्र का सौंदला गाँव बना देश का पहला ‘जाति मुक्त’ गांव, युवाओं की पहल से लिया ऐतिहासिक संकल्प
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1 Mar 2026
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महाराष्ट्र का सौंदला गाँव बना देश का पहला ‘जाति मुक्त’ गांव, युवाओं की पहल से लिया ऐतिहासिक संकल्प

अहमदनगर (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर) जिले के सौंदला (Soundala) गांव ने 5 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक सामुदायिक निर्णय के तहत खुद को जाति-मुक्त (Caste-Free) गांव घोषित किया। इस पहल ने देश भर के गांवों में सामाजिक बराबरी, मानवता और संविधान की मूल मान्यताओं की दिशा में एक शक्तिशाली संदेश भेजा है।

क्या हुआ?

गांव की Gram Sabha में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया कि अब से गांव में किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म, पंथ या वंश के आधार पर विभाजित या भेदभाव नहीं किया जाएगा।यह प्रस्ताव “Aamchi jaat… manav” — यानी “मेरी जाति… मानवता है” के सिद्धांत पर आधारित है। 

समानता के सिद्धांत; इस निर्णय के तहत तय हुआ कि:सभी सार्वजनिक स्थान — जैसे मंदिर, जल स्रोत, स्कूल, समाज भवन और सरकारी सेवा केंद्र — सभी के लिए बराबर खुले रहेंगे।किसी को भी जाति के नाम पर अलग नहीं रखा जाएगा या अपमानित नहीं किया जाएगा।समुदाय में जाति आधारित उपेक्षा, अस्पृश्यता और भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।

कैसे निर्णय लिया गया?

यह निर्णय 5 फरवरी को ग्रामसभा में लिया गया, जिसमें सरपंच Sharad Argade ने प्रस्ताव रखा। स्थानीय समाज सेवक Pramod Zinjade के मार्गदर्शन में यह पहल लागू की गई।ग्रामीणों ने संविधान के प्रस्तावना के मूल सिद्धांतों — स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व — को अपनाते हुए यह निर्णय लिया। 

स्थानिक और सामाजिक प्रभाव

सौंदला में लगभग 2,500 निवासी हैं, जिनमें विविध जातियों और धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोग शामिल हैं। गाँव के लोगों का कहना है कि:इस फैसले का लक्ष्य सामाजिक दूरी को मिटाना और एकता को बढ़ावा देना है।आगामी पीढ़ियों के लिए यह एक सकारात्मक उदाहरण है कि समाज में इंसानियत पहले आती है, जाति नहीं। 

विशेष बातें

यह निर्णय केवल एक सामाजिक संकल्प है; सरकारी दस्तावेजों में अभी भी जाति प्रमाणपत्र और सरकारी नीति के तहत वर्गीकरण मौजूद रहेगा।कुछ सामाजिक संगठन अब इसके आधार पर “International Caste-Free Day” के रूप में 5 फरवरी को वैश्विक पहचान देने का सुझाव भी दे रहे हैं।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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