सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश पंचायत-निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले पूरे हों...

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत एवं निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया हर हाल में 15 अप्रैल 2026 तक पूरी की जाए। कोर्ट ने पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
January 6, 2026 • 9:51 AM  36
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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश पंचायत-निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले पूरे हों...
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6 Jan 2026
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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश पंचायत-निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 से पहले पूरे हों...

जयपुर/नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत एवं निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि चुनाव किसी भी स्थिति में तय समय-सीमा के भीतर कराए जाएं और पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण की जाए। अदालत ने साफ किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थानीय निकाय चुनावों में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है।

इस मामले में पंचायतों के परिसीमन और पुनर्गठन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट का मानना था कि परिसीमन और पुनर्गठन राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार क्षेत्र है और जब तक इसमें संवैधानिक या कानूनी उल्लंघन स्पष्ट रूप से सामने न आए, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

स्थानीय स्वशासन संस्थाएं लोकतंत्र की बुनियाद हैं।

पंचायत और निकाय चुनाव समय पर न होने से जनप्रतिनिधित्व प्रभावित होता है।

राज्य सरकार किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी कारण का हवाला देकर चुनाव टाल नहीं सकती।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची और अधिसूचना जैसे सभी चरण तय समय में पूरे किए जाएं, ताकि निर्धारित समय सीमा तक निर्वाचित प्रतिनिधि कार्यभार संभाल सकें।

राज्य सरकार के लिए सख्त संदेश

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर चुनाव आयोग के साथ समन्वय कर तेजी से तैयारियां पूरी करने की जिम्मेदारी आ गई है। कोर्ट ने संकेत दिया कि भविष्य में यदि चुनाव में देरी होती है तो इसे अदालत के आदेश की अवहेलना माना जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं

परिसीमन और पुनर्गठन को लेकर दाखिल याचिका में चुनाव प्रक्रिया पर रोक की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि चुनाव रोकना अंतिम विकल्प होता है और इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं है, जिससे चुनाव टाले जाएं।

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव अब टलने वाले नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य में स्थानीय स्वशासन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है, वहीं आम जनता को भी जल्द अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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