बालोतरा में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के दौरे पर कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा: 'हमें किसी ने आपके आने की सूचना नहीं दी'
बालोतरा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एकदिवसीय दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं ने खुलेआम नाराजगी जाहिर की। 1996 से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें दौरे की कोई सूचना नहीं दी गई, वे खुद अपनी मर्जी से आए। राजे ने पचपदरा विधायक की ओर इशारा कर पूछा- "आपने इनको बताया नहीं?" कार्यकर्ताओं का आरोप- "वोट के समय ही कार्यकर्ता याद आते हैं।"
बालोतरा (राजस्थान), 5 दिसंबर 2025: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शुक्रवार को बालोतरा के एकदिवसीय दौरे पर पहुंचीं। यह दौरा भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों के बीच हुआ, जहां राजे ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। हालांकि, इस दौरान कल्याणपुरा क्षेत्र में एक दिलचस्प और तीखी घटना घटी, जिसमें कार्यकर्ताओं ने खुलेआम पार्टी नेतृत्व पर लापरवाही का आरोप लगाया। पूर्व प्रधान उम्मेदसिंह अराबा और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने राजे से शिकायत की कि उन्हें उनके दौरे की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है।
घटना का पूरा विवरण: कार्यकर्ताओं की नाराजगी और राजे का तीखा संकेत दोपहर करीब 2 बजे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे कल्याणपुरा पहुंचीं, जहां वे स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलने वाली थीं। यहां सैकड़ों समर्थक इकट्ठा हुए थे, लेकिन कई कार्यकर्ताओं का दावा था कि वे अपनी मर्जी से ही वहां पहुंचे हैं। इनमें से एक प्रमुख कार्यकर्ता, जो 1996 से भाजपा से जुड़े हुए हैं, ने राजे के सामने ही खुलकर अपनी व्यथा बयां की। उन्होंने कहा, "हमें किसी ने आपके आने की सूचना नहीं दी। राजे से भाजपा नेता बोले- जिलाध्यक्ष ने भी नहीं बताया, हम तो खुद आए।"यह कार्यकर्ता उम्मेदसिंह अराबा के साथ लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने आगे बताया कि वे 1996 से लगातार पार्टी के प्रति समर्पित हैं और पचपदरा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। लेकिन इस बार राजे के दौरे की कोई आधिकारिक सूचना न तो जिला अध्यक्ष की ओर से मिली और न ही किसी अन्य नेता की। कार्यकर्ता ने जोर देकर कहा, "हम तो खुद ही आए हैं, वरना हमें पता भी न चलता।" यह बयान न केवल पार्टी की संगठनात्मक कमियों को रेखांकित करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का भी आईना दिखाता है।इस शिकायत पर वसुंधरा राजे ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पचपदरा के विधायक की ओर इशारा करते हुए कहा, "आपने इनको बताया नहीं?" यह संकेत स्पष्ट रूप से स्थानीय विधायक पर जिम्मेदारी डालने वाला था, जो मौके पर मौजूद थे। राजे का यह बयान कार्यकर्ताओं के बीच तालियां बजवा गया और एकबारगी सभा में सन्नाटा छा गया। पूर्व सीएम ने आगे कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत हैं और उनकी भागीदारी के बिना कोई कार्यक्रम सफल नहीं हो सकता।
'वोट आते हैं तब कार्यकर्ता की जरूरत पड़ती है': कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटा घटना तब और तीखी हो गई जब कार्यकर्ताओं ने पूर्व सीएम के सामने ही पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उम्मेदसिंह अराबा ने कहा, "वोट आते हैं तब कार्यकर्ता की जरूरत पड़ती है। चुनाव के समय तो हम सबको याद किया जाता है, लेकिन बाकी समय हम भुला दिए जाते हैं।" यह बयान भाजपा की आंतरिक राजनीति में चल रही खींचतान को दर्शाता है, खासकर वसुंधरा राजे गुट और अन्य नेताओं के बीच। कार्यकर्ताओं का कहना था कि दौरे की सूचना न देने से न केवल उनकी उपस्थिति प्रभावित हुई, बल्कि पार्टी का आधार कमजोर पड़ रहा है।कल्याणपुरा में इकट्ठे हुए अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि वे बालोतरा जिले के ग्रामीण इलाकों से विशेष रूप से आए थे, लेकिन जिला स्तर पर कोई समन्वय नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी लापरवाही जारी रही, तो आने वाले चुनावों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। यह घटना राजे के दौरे को एक राजनीतिक संदेश के रूप में बदल गई, जहां पूर्व सीएम ने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि उनकी बातों को ऊपर तक पहुंचाया जाएगा।