"73 की उम्र में हनुमान सिंह इंदा ने PHD कर साबित किया, शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं"
जोधपुर के हनुमान सिंह इंदा ने 73 साल की उम्र में अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल कर एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। 41 साल तक विद्यार्थियों को पढ़ाने के बाद, रिटायरमेंट को उन्होंने नई शुरुआत बनाया और अपने जुनून व मेहनत से यह साबित किया कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती। उनकी कहानी विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा है कि लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
जोधपुर के हनुमान सिंह इंदा ने अपनी जिंदगी की एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि शिक्षा और ज्ञान अर्जन की कोई उम्र सीमा नहीं होती। 73 साल की उम्र में उन्होंने अर्थशास्त्र में PHD पूरी कर एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है। यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है, क्योंकि हनुमान सिंह ने 41 साल तक स्कूल और कॉलेज में शिक्षक विद्यार्थियों को अर्थशास्त्र पढ़ाया और रिटायरमेंट के बाद भी अपने सीखने के जुनून को बरकरार रखा।
शिक्षा के प्रति समर्पण और लंबा सफर:
हनुमान सिंह इंदा का जीवन शिक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर के 41 साल विद्यार्थियों को पढ़ाने में बिताए, जहां उन्होंने न केवल अर्थशास्त्र जैसे जटिल विषय को सरल बनाकर समझाया, बल्कि अनगिनत छात्रों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित भी किया। लेकिन उनकी अपनी पढ़ाई की भूख कभी कम नहीं हुई। रिटायरमेंट, जो आमतौर पर लोगों के लिए आराम का समय माना जाता है, हनुमान सिंह के लिए एक नई शुरुआत बन गया। उन्होंने फैसला किया कि वह अपने ज्ञान को और गहरा करेंगे और पीएचडी की डिग्री हासिल करेंगे।