पर्यावरण संरक्षण: अपने आप को पूछिए हम क्या कर रहे हैं प्रकृति के साथ 

विश्व पर्यावरण दिवस पर राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण के दावों और जमीनी हकीकत की पड़ताल। औद्योगिकीकरण, अवैध खनन, और प्रदूषण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता, साथ ही दिखावे के बजाय सच्चे प्रयासों की जरूरत पर जोर। लेख व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी, योजनाओं की जवाबदेही, और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की अपील करता है।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
June 5, 2025 • 10:20 AM  97
राजस्थान
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पर्यावरण संरक्षण: अपने आप को पूछिए हम क्या कर रहे हैं प्रकृति के साथ 
“पर्यावरण संरक्षण: अपने आप को पूछिए हम क्या कर रहे हैं प्रकृति के साथ ”
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5 Jun 2025
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पर्यावरण संरक्षण: अपने आप को पूछिए हम क्या कर रहे हैं प्रकृति के साथ 

आज 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस। हर साल इस दिन हम पर्यावरण संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पौधे लगाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और सोशल मीडिया पर अपनी "जिम्मेदारी" का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब केवल दिखावा है, या हम वाकई में धरती को बचाने के लिए कुछ कर रहे हैं? राजस्थान जैसे राज्य में, जहां सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन (NGO) पर्यावरण संरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं, क्या जमीनी स्तर पर कोई बदलाव आ रहा है? या यह सब केवल कागजी आंकड़ों और टेंडरों की बाजीगरी बनकर रह गया है?

औद्योगिकीकरण के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। अवैध खनन ने नदियों और नालों के रास्ते विलुप्त कर दिए हैं। शहरों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा को दमघोंटू बना रहा है। सोलर प्रोजेक्ट्स और अन्य विकास योजनाओं के नाम पर हरियाली उजाड़ी जा रही है, और बदले में कागजों पर लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पेड़ वास्तव में धरती पर जड़ें जमा रहे हैं? क्या कोई उनकी देखभाल करता है? या वे केवल आंकड़ों में जिंदा हैं?

जीव-जंतुओं की प्रजातियां तेजी से लुप्त हो रही हैं। पक्षियों की चहचहाहट गायब हो रही है, और जंगलों की हरियाली सिमट रही है। हम एक पौधा लगाते हैं, दस फोटो खींचते हैं, और सोचते हैं कि हमने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। लेकिन उस पौधे का क्या, जो पानी और देखभाल के अभाव में सूख जाता है? क्या हमने कभी उसकी सुध ली?

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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