पीड़ित वैशाली नगर, अजमेर निवासी प्रॉपर्टी कारोबारी हितेश कुमार साहू हैं। उन्होंने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। घटना दिसंबर 2025 की बताई जा रही है, जब उनके मोबाइल पर ठगों का संपर्क शुरू हुआ।
ठगी कैसे हुई? पूरी घटना क्रमवार
शुरुआत व्हाट्सएप मैसेज से — दिसंबर 2025 में हितेश कुमार के मोबाइल पर एक व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले ने खुद को RB शेयर मार्केट का एडवाइजर बताया।मुनाफे का झांसा — ठग ने बातचीत बढ़ाते हुए कहा कि उनकी कंपनी में शेयर मार्केट या निवेश करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने पीड़ित को लुभाने के लिए भारी रिटर्न का वादा किया।व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा — जल्द ही पीड़ित को एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर लिया गया। इस ग्रुप में कई अन्य लोग भी जुड़े हुए दिखाए गए, जो कथित तौर पर पहले से निवेश कर मुनाफा कमा रहे थे। यह ग्रुप फेक था, जिसका इस्तेमाल ठगों ने भरोसा बनाने के लिए किया।फर्जी ऐप डाउनलोड करवाया — ठगों ने एक लिंक भेजा और पीड़ित से कहा कि मोबाइल पर एप्लीकेशन डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन करवाएं। पीड़ित ने निर्देशानुसार ऐप डाउनलोड किया और रजिस्ट्रेशन पूरा किया।पैसे ट्रांसफर करवाए — ऐप के जरिए पीड़ित को अलग-अलग ट्रांजैक्शन करने के लिए कहा गया। उन्होंने कुल 8 लाख 50 हजार रुपये विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर कर दिए।
ऐप में फेक मुनाफा दिखाया — निवेश के बाद ऐप में पीड़ित को दिखाया गया कि उनका निवेश बढ़कर करीब 51 लाख रुपये हो गया है। इससे पीड़ित को और लालच हुआ।पैसे निकालने की कोशिश नाकाम — जब पीड़ित ने पैसे विड्रॉ करने की कोशिश की, तो रकम नहीं निकली। बार-बार प्रयास करने पर भी सफलता नहीं मिली।कंपनी से संपर्क करने पर इनकार — पीड़ित ने कंपनी के दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, लेकिन कंपनी ने ऐप से जुड़े होने से इनकार कर दिया। तब जाकर पीड़ित को ठगी का पता चला।
पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित ने तुरंत अजमेर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस विभिन्न ट्रांजैक्शन डिटेल्स, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और ऐप के बारे में जांच कर रही है ताकि ठगों तक पहुंचा जा सके।
साइबर विशेषज्ञों की सलाह
ऐसे मामलों में सतर्क रहें:अनजान नंबरों से आए निवेश के ऑफर पर भरोसा न करें।किसी भी लिंक से ऐप डाउनलोड करने से पहले जांच लें।व्हाट्सएप ग्रुप में दिखाए जा रहे "सफल निवेशकों" की कहानियां ज्यादातर फर्जी होती हैं।पैसे ट्रांसफर करने से पहले कंपनी की वैधता चेक करें (SEBI रजिस्टर्ड ब्रोकर आदि)।संदिग्ध होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन (1930) या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।