संसद में मनरेगा संशोधन विधेयक पर सीपीएम सांसद अमराराम का तीखा हमला: "सरकार गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है"

राजस्थान के सीकर से CPI(M) सांसद अमराराम ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 (VB-G RAM G बिल) पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस बिल को मनरेगा को कमजोर करने वाली साजिश बताया और इसे वापस लेने की मांग की। अमराराम ने कहा कि खेती में मशीनीकरण से ग्रामीण मजदूरों का संकट बढ़ा है, फिर भी सरकार ने उनका रोजगार छीन लिया। उन्होंने विवादास्पद बयान देते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार महात्मा गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है। सांसद ने बजट कटौती (1.20 लाख करोड़ से 68 हजार करोड़), सिर्फ 5% मजदूरों को 100 दिन काम मिलने और फंडिंग में 60:40 अनुपात जैसे बदलावों पर भाजपा की कथनी-करनी में अंतर बताया।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 18, 2025 • 5:33 PM  10
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संसद में मनरेगा संशोधन विधेयक पर सीपीएम सांसद अमराराम का तीखा हमला: "सरकार गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है"
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18 Dec 2025
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संसद में मनरेगा संशोधन विधेयक पर सीपीएम सांसद अमराराम का तीखा हमला: "सरकार गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है"

सीकर, 18 दिसंबर 2025: लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 (संक्षिप्त में VB-G RAM G बिल) पर चली लंबी बहस के दौरान राजस्थान के सीकर से CPI(M) सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के हक छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इस विधेयक को मनरेगा को कमजोर करने वाली साजिश करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने या सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की।अमराराम ने अपने भाषण में कहा कि यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह रिप्लेस करने का प्रयास है। उन्होंने इसे "जी-राम-जी का बिल" बताते हुए कहा, "मनरेगा को रिप्लेस करने के लिए जो जी-राम-जी का बिल सरकार लेकर आई है, उसे वापस लेना चाहिए।"

ग्रामीण मजदूरों का संकट और सरकार की उदासीनता सांसद ने खेती में मशीनीकरण के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि बुवाई से कटाई तक सब कुछ मशीनों से हो रहा है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने गरीबों का रोजगार तक छीन लिया है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, "ये सरकार महात्मा गांधी नहीं, गोडसे की तपस्या कर रही है।" यह बयान सदन में काफी चर्चा का विषय बना और विपक्षी सदस्यों ने इसका समर्थन किया।

भाजपा की कथनी और करनी में अंतर अमराराम ने मनरेगा की उत्पत्ति याद दिलाते हुए कहा कि UPA-1 सरकार के समय जब मजदूरी कम हुई थी, तब ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाला कानून बनाया गया, जिसमें न्यूनतम 100 दिन की मजदूरी का प्रावधान था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है। भाजपा मनरेगा के मूल प्रावधानों से भाग रही है।पहले मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी।अब प्रस्तावित विधेयक में मजदूरी का खर्च केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में बांटने की तैयारी है, जो राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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