स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के किनारों पर लगी ईंटें और निर्माण सामग्री धीरे-धीरे बाहर निकलने लगी हैं। लोगों का कहना है कि करीब दो महीने पहले पुल के अंदर भरी गई रेती भी बाहर आने लगी थी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे। अब स्थिति और अधिक खराब होने के बाद ठेकेदार द्वारा मरम्मत के नाम पर अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं।
मौके पर देखा गया कि पुल के निर्माण के दौरान लगाए गए सीमेंट के रोल और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को बाहर निकाल दिया गया है। उनकी जगह अब लोहे की एंगल और सरियों का सहारा देकर पुल की ईंटों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लगाए गए ये सरिए और एंगल साफ तौर पर यह संकेत दे रहे हैं कि पुल के कुछ हिस्सों में गंभीर तकनीकी समस्या उत्पन्न हो चुकी है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त कैसे हो गया? यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा गया होता तो महज डेढ़-दो साल में इस प्रकार की स्थिति क्यों पैदा होती? साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या सरियों और एंगल के सहारे किया गया यह जुगाड़ लंबे समय तक पुल को सुरक्षित रख पाएगा?
रिंग रोड पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यदि समय रहते पुल की तकनीकी जांच नहीं करवाई गई और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने भी पुल की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच करवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या पुल का तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा? क्या निर्माण में हुई कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार की जांच होगी? या फिर यह पुल फिलहाल जुगाड़ के सहारे ही चलता रहेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल पुल की मौजूदा स्थिति लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है।