करियर की ऊंचाइयों से विवादों के घेरे तक…आखिर क्या है पूरा मामला?
एक ऐसा नाम जो कभी उपलब्धियों के लिए जाना जाता था, अब सवालों के घेरे में है। आखिर क्या हुआ ऐसा कि अचानक सबकी नजरें इसी पर टिक गईं? परत दर परत खुलती इस कहानी में कई ऐसे पहलू सामने आ रहे हैं, जो सिस्टम को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं…
राजस्थान में एक चर्चित अधिकारी पर लगे आरोप: करियर से विवाद तक की पूरी कहानी
राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम लगातार चर्चा में है—काजल मीणा। एक ओर उनका शैक्षणिक और पेशेवर सफर बेहद प्रभावशाली माना जाता रहा है, तो दूसरी ओर हाल ही में सामने आए आरोपों ने उनके पूरे करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है।
शानदार शुरुआत: पढ़ाई से प्रशासन तक
काजल मीणा का शुरुआती सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं रहा।
उन्होंने IIT Mandi से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की—जो देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाता है।इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में सेवाएं दीं।दिल्ली में दूरसंचार विभाग (DoT) में ASO और EPFO में अधिकारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक अनुभव भी हासिल किया।इन सबके बाद उन्होंने सिविल सेवा का रुख किया और वर्ष 2024 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में टॉप कर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।
पोस्टिंग और शुरुआती विवाद
RAS में चयन के बाद उनकी पहली पोस्टिंग प्रतापगढ़ में की गई थी, लेकिन उन्होंने वहां जॉइन नहीं किया। इसके बाद उन्हें करौली जिले के नादौती में SDM के पद पर नियुक्त किया गया। यहीं से उनका नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा में आने लगा। कुछ लोगों ने उनके प्रभाव और कथित रिश्तों को लेकर सवाल उठाए, हालांकि उस समय तक कोई ठोस आरोप सामने नहीं आया था।