आधी रात का सन्नाटा, अचानक गूंजती गोली की आवाज और फिर अगली सुबह किसी बुजुर्ग की लाश। उत्तर प्रदेश के रायबरेली और सुल्तानपुर जिले की सीमा से लगे गांवों में कई वर्षों तक यही खौफ पसरा रहा। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर उनका दुश्मन कौन है। लेकिन जब सच सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया। हत्यारा कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि पूजा-पाठ करने वाला एक साधारण दुकानदार था—सदाशिव साहू।
एक सुबह गांव में उस समय सनसनी फैल गई जब चक्की संचालक जगदीश की लाश उनके बिस्तर पर मिली। सिर के पिछले हिस्से को बेहद करीब से मारी गई गोली ने चकनाचूर कर दिया था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
एक जैसा तरीका, एक जैसी मौत
अगले कुछ वर्षों में कई बुजुर्गों की हत्या हुई। हर बार तरीका एक जैसा था—
- आधी रात को हमला
- भरवा बंदूक से नजदीक से गोली
- घर के बाहर सो रहे बुजुर्ग निशाने पर
- घटनास्थल से अंधेरे में फरार हमलावर
लोगों ने रात में बाहर सोना बंद कर दिया। गांवों में डर का ऐसा माहौल था कि सूर्यास्त के बाद सन्नाटा छा जाता था।
पुलिस ने जोड़ा हत्याओं का पैटर्न
साल 2003 में जांच की जिम्मेदारी एएसपी वीपी श्रीवास्तव को सौंपी गई। पुरानी फाइलों की पड़ताल में चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया।
- 1998 से 2004 तक लगातार हत्याएं
- करीब 35 संदिग्ध मर्डर
- ज्यादातर शिकार 50 से 70 वर्ष के पुरुष
- हत्याएं शनिवार, रविवार या सोमवार की रात
पुलिस ने प्रभावित गांवों में विशेष चौकियां बनाई और निगरानी बढ़ा दी।
एक जूते ने खोल दिया राज
8 नवंबर 2004 को सैमसी गांव में विश्राम साहू की हत्या के बाद पहली बार पुलिस को अहम सुराग मिला। भागते समय हत्यारा नहर में कूद गया और पीछे एक जूता छूट गया।
स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस का शक सदाशिव साहू पर गया। तलाशी के दौरान उसके घर से नकली दाढ़ी-मूंछ, भेष बदलने वाले कपड़े और लाइसेंसी बंदूक बरामद हुई।
‘खून देखने की हूक उठती थी’
पूछताछ में सदाशिव ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस अधिकारियों तक को हिला दिया।
उसने कबूल किया कि उसे लोगों का खून बहता देख मानसिक संतुष्टि मिलती थी। उसके मुताबिक यदि वह कुछ समय तक किसी की हत्या न करे तो उसे बेचैनी होने लगती थी।
उसने 22 हत्याओं में अपनी भूमिका स्वीकार की। जांच में उसके बेटे जयकरन का नाम भी सामने आया, हालांकि बाद में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उसे अदालत ने बरी कर दिया।
18 साल बाद मिला इंसाफ
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2022 में अदालत ने सदाशिव साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि सजा के एक साल बाद 2023 में जेल के भीतर ही उसकी मौत हो गई।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के सबसे खौफनाक सीरियल किलर मामलों में से एक का अंत हुआ, लेकिन गांवों में फैली दहशत और उन परिवारों का दर्द आज भी लोगों की यादों में जिंदा है।