केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग को मंजूरी, 1 जनवरी 2026 से सैलरी में डबल होने की उम्मीद.
केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है, जिससे 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों की सैलरी-पेंशन में भारी बढ़ोतरी होगी। न्यूनतम बेसिक पे 18,000 से 44,000 रुपये तक जाने की उम्मीद, फिटमेंट फैक्टर 2.44-2.46। 6 महीने देरी हुई तो एरियर एकमुश्त मिलेगा (उदाहरण: 1.56 लाख रुपये)। आयोग 18 महीने में रिपोर्ट देगा।
नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने आज आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला देशभर के लगभग 48-50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 65-69 लाख पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आयोग अपने गठन के 18 महीने के अंदर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा, और नई वेतन संरचना संभवतः 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगी। अगर किसी कारणवश इसमें देरी हुई, तो बकाया राशि (एरियर) का भुगतान भी रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव से एकमुश्त किया जाएगा। यह आयोग न केवल सैलरी और पेंशन में इजाफा लाएगा, बल्कि महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा।
आठवें वेतन आयोग क्या है और इसका उद्देश्य क्या रहेगा?
केंद्रीय वेतन आयोग (Central Pay Commission - CPC) एक स्वतंत्र निकाय होता है, जो हर दशक में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करता है। आठवां वेतन आयोग सातवें वेतन आयोग (जो 1 जनवरी 2016 से लागू है) की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप वेतन संरचना को अपडेट करना है। इसमें महंगाई भत्ता (DA), जो फिलहाल 55% तक पहुंच चुका है, को बेसिक पे में मर्ज करने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों की न्यूनतम आय में भारी उछाल आएगा।आयोग में एक चेयरपर्सन, एक पार्ट-टाइम मेंबर और एक मेंबर-सेक्रेटरी शामिल होंगे। जनवरी 2025 में कैबिनेट ने इसका सैद्धांतिक अनुमोदन दिया था, और अब ToR की मंजूरी के साथ प्रक्रिया तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयोग पिछले आयोगों की तरह 200 से अधिक भत्तों की समीक्षा करेगा, जिसमें कुछ को समाप्त या मर्ज किया जा सकता है, ताकि सैलरी स्ट्रक्चर सरल और पारदर्शी बने।