जोजरी नदी बना जहरीली नाली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा - गांवों में नहीं बचा पीने लायक पानी

सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी में फैक्ट्रियों के जहरीले अपशिष्ट से उत्पन्न पर्यावरण संकट पर स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 16, 2025 • 1:18 PM  351
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जोजरी नदी बना जहरीली नाली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा - गांवों में नहीं बचा पीने लायक पानी
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जोजरी नदी बना जहरीली नाली, सुप्रीम कोर्ट ने कहा - गांवों में नहीं बचा पीने लायक पानी

सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर की जोजरी नदी में औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट के कारण उत्पन्न भयावह पर्यावरणीय संकट पर स्वत: संज्ञान लिया है। मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि फैक्ट्रियों और घरेलू कचरे से नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि आसपास के गांवों में पीने योग्य पानी तक उपलब्ध नहीं है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उपयुक्त आदेश के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

नदी में जहर, गांवों में तबाही

जोजरी नदी, जो नागौर जिले की पंडालू पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर जिले में लूणी नदी से मिलती है, अब एक जहरीली धारा में तब्दील हो चुकी है। बारिश के बाद स्थिति और भी बदतर हो गई है, जहां नदी के किनारे काले, जहरीले पानी के तालाब बन गए हैं। जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली जिलों की टेक्सटाइल और स्टील रीरोलिंग इकाइयों से निकलने वाला अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट बिना किसी रोक-टोक के नदी में डाला जा रहा है। इसका असर न केवल पर्यावरण पर पड़ा है, बल्कि 50 से अधिक गांवों और बस्तियों के लगभग 15-20 लाख लोग इस संकट की चपेट में हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण पशु-पक्षी असमय मर रहे हैं, और कई गांवों में स्वच्छ पानी की कमी ने स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। खेतों में सिंचाई के लिए भी यही प्रदूषित पानी उपयोग हो रहा है, जिससे फसलों और मिट्टी की उर्वरता पर बुरा असर पड़ रहा है।

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