भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वेदांता ऑयल एंड गैस सोमवार को शेयर बाजार में अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ सूचीबद्ध होने जा रही है। कंपनी के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ‘VOGL’ नाम से कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे।
वेदांता समूह के डिमर्जर के बाद यह कंपनी की पहली स्वतंत्र लिस्टिंग है, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी का मानना है कि स्वतंत्र सूचीबद्धता से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, विकास की गति तेज होगी और निवेशकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन के नए अवसर खुलेंगे।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में निभाएगी अहम भूमिका
भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता बन गया है। इसी दिशा में वेदांता ऑयल एंड गैस, जो ‘केयर्न’ ब्रांड के तहत काम करती है, अन्वेषण, उत्पादन और आधुनिक तकनीकों के जरिए तेल एवं गैस संसाधनों के विकास पर फोकस कर रही है।
44 ब्लॉक और अरबों बैरल संसाधनों का आधार
कंपनी के पास देशभर में 44 तेल एवं गैस ब्लॉक हैं, जो 47,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। इसके पास 1.321 बिलियन बैरल तेल समतुल्य सिद्ध भंडार (Proved Reserves) और 2.9 बिलियन बैरल तेल समतुल्य संभावित संसाधन मौजूद हैं।
इन संसाधनों के आधार पर कंपनी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
2029 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
वेदांता ऑयल एंड गैस ने वित्त वर्ष 2029 तक अपने उत्पादन को बढ़ाकर 150 kboepd (हजार बैरल तेल समतुल्य प्रतिदिन) से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।
इसके लिए कंपनी ने एक व्यापक निवेश रोडमैप तैयार किया है, जिसमें शामिल हैं—
- नए तेल एवं गैस क्षेत्रों की खोज (Exploration)
- तेल रिकवरी तकनीकों में सुधार
- डीप गैस परियोजनाओं का विकास
- ऑफशोर प्रोजेक्ट्स का विस्तार
- तकनीक आधारित उत्पादन वृद्धि
भारत के तेल उत्पादन में 50% हिस्सेदारी का लक्ष्य
कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत के कुल तेल उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देना है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो देश की आयात निर्भरता कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए नई संभावनाएं
स्वतंत्र सूचीबद्धता के साथ वेदांता ऑयल एंड गैस अब एक समर्पित ऊर्जा कंपनी के रूप में काम करेगी। कंपनी का मानना है कि नई संरचना उसे तेजी से फैसले लेने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने में मदद करेगी।