कोटा पुलिस की अनूठी और सराहनीय पहल: नशे के आदी लोगों को 'नई जिंदगी' देने के लिए शेल्टर हाउस बनेंगे
कोटा पुलिस ने नशे के आदी लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए अनूठी पहल की है। शहर में 20-25 लोगों की क्षमता वाला विशेष शेल्टर हाउस बनाया जाएगा, जहां काउंसलिंग, उपचार और पुनर्वास की सुविधा मिलेगी। यह ऑपरेशन 'गरुड़ व्यूह' और नशा मुक्त अभियान का हिस्सा है, जिसमें एनडीपीएस फंड से संचालन होगा। पुलिस ने प्रभावित लोगों की सूची तैयार की है और चरणबद्ध तरीके से उन्हें नशे से मुक्त करेगी।
कोटा, राजस्थान की कोचिंग नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां नशे की समस्या भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। इस समस्या से निपटने के लिए कोटा पुलिस ने एक क्रांतिकारी और मानवीय कदम उठाया है। अब पुलिस न केवल नशे की तस्करी और बिक्री पर सख्त कार्रवाई कर रही है, बल्कि नशे की लत में फंसे लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए भी सक्रिय हो गई है। इसी क्रम में शहर में विशेष नशा मुक्ति शेल्टर हाउस स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
पहल का मुख्य उद्देश्य
पुलिस का मकसद साफ है—कोटा को पूर्ण रूप से नशा मुक्त बनाना। इसके लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं, बल्कि नशे के शिकार लोगों को सहारा देकर उन्हें नई जिंदगी प्रदान करना भी जरूरी है। शेल्टर हाउस उन लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय का काम करेंगे, जो सड़कों, पुलियों के नीचे, रेलवे लाइनों के आसपास या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नशे की गिरफ्त में रहते हैं। यहां उन्हें नशे से दूर रखते हुए काउंसलिंग, चिकित्सकीय उपचार और पुनर्वास की पूरी सुविधा उपलब्ध होगी।शुरुआत में एक शेल्टर हाउस की क्षमता 20 से 25 लोगों की होगी। अनुभव और आवश्यकता के आधार पर इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हो सकें।