पन्नाधाय आखिर गुर्जर थीं या राजपूत? इतिहास के इस दावे ने छेड़ दी नई बहस !!
भारत के नारी रत्न' पुस्तक में उन्हें खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी बताया गया है, जबकि गुर्जर समाज इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बता रहा है।
मेवाड़ के इतिहास में त्याग और बलिदान की मिसाल मानी जाने वाली पन्नाधाय की जाति को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'भारत के नारी रत्न' में पन्नाधाय को 'खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी' बताया गया है। इस उल्लेख के बाद गुर्जर समाज ने आपत्ति जताते हुए दावा किया है कि पन्नाधाय गुर्जर समुदाय से थीं और पुस्तक में उनकी ऐतिहासिक पहचान को बदलकर प्रस्तुत किया गया है।
गुर्जर समाज की विभिन्न संस्थाओं का कहना है कि इस तरह का उल्लेख इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ है और इससे आने वाली पीढ़ियों के सामने गलत जानकारी पहुंचेगी। समाज ने इस मामले में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर संशोधन की मांग भी उठाई है।
मेवाड़ के इतिहास पर लंबे समय से शोध कर रहे इतिहासकार प्रो. चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि पन्नाधाय की जाति को लेकर भ्रम की शुरुआत ब्रिटिश अधिकारी और इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड के लेखन से हुई, जिसे बाद की कुछ पुस्तकों में भी दोहराया गया। उनके अनुसार, खींची गोत्र केवल राजपूतों में ही नहीं, बल्कि गुर्जर समाज में भी पाया जाता है, इसलिए केवल गोत्र के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।