BAP विधायक पर रिश्वत का केस, स्पीकर की हरी झंडी से मुश्किलें बढ़ीं
बीएपी विधायक जयकृष्ण पटेल की विधानसभा सदस्यता खतरे में है, क्योंकि सदाचार कमेटी की रिपोर्ट, जो घूसकांड के आरोपों की जांच के बाद तैयार की गई, उनके खिलाफ है और इसे आज विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है।
बागीदौरा (बांसवाड़ा) से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक जयकृष्ण पटेल की विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटक रही है। उन पर विधानसभा में सवाल न पूछने के बदले 20 लाख रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप है। इस मामले की जांच के लिए विधानसभा की सदाचार कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे आज विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को सौंपा जाएगा। सूत्रों की मानें तो यह रिपोर्ट जयकृष्ण पटेल के पक्ष में नहीं है, और यदि आरोप सिद्ध हुए तो उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है।
घूसकांड ने मचाया सियासी तूफान
जयकृष्ण पटेल को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 4 मई 2025 को जयपुर में उनके विधायक आवास पर 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप है कि पटेल ने एक खनन कारोबारी से विधानसभा में खनन से जुड़े सवाल हटाने के लिए पहले 10 करोड़ रुपये की मांग की थी, जो बाद में ढाई करोड़ में तय हुई। इस डील के तहत पहली किस्त के रूप में 20 लाख रुपये दिए गए, जिसके बाद एसीबी ने ट्रैप ऑपरेशन चलाकर उन्हें पकड़ लिया।
एसीबी के महानिदेशक रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि विधायक के खिलाफ ऑडियो, वीडियो और तकनीकी सबूत मौजूद हैं। ट्रैप के दौरान उनके हाथों पर रंगे नोटों की स्याही भी मिली, जो उनके रिश्वत लेने की पुष्टि करती है। इस मामले में उनके चचेरे भाई विजय कुमार पटेल और दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया।