राजस्थान में अनुकंपा नियुक्ति नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव: आवेदन की समय सीमा अब 180 दिन

राजस्थान सरकार ने मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को राहत देते हुए अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन की समय सीमा 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन कर दी है। यह बदलाव 3 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में批准 किया गया। पत्नी को प्राथमिक अधिकार बना हुआ है, और वह अधिकार त्यागकर पुत्र या पुत्री को सिफारिश कर सकती है। इससे परिवारों को दस्तावेज तैयार करने के लिए अधिक समय मिलेगा।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 18, 2025 • 12:16 PM  21
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राजस्थान में अनुकंपा नियुक्ति नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव: आवेदन की समय सीमा अब 180 दिन
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18 Dec 2025
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राजस्थान में अनुकंपा नियुक्ति नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव: आवेदन की समय सीमा अब 180 दिन

राजस्थान सरकार ने मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में संशोधन किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 3 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। मुख्य बदलाव यह है कि अब आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने की समय सीमा 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिनों कर दी गई है। इससे परिवारों को दस्तावेज जुटाने और आवेदन तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

मुख्य बदलाव क्या हैं? पहले की व्यवस्था: राजस्थान मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996 के तहत आवेदन मृत्यु की तारीख से 90 दिनों के अंदर करना अनिवार्य था। कई मामलों में परिवार दुःख और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण समय सीमा चूक जाते थे, जिससे उन्हें नौकरी का लाभ नहीं मिल पाता था। नई व्यवस्था: अब यह समय सीमा दोगुनी होकर 180 दिनों की हो गई है। यह संशोधन राजस्थान अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996 में किया जाएगा। उद्देश्य: संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि इस बदलाव से मृत कर्मचारी के आश्रितों को विभिन्न दस्तावेज और शपथ-पत्र तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

पत्नी को प्राथमिकता का नियम बरकरार अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996 के अनुसार:मृतक कर्मचारी की पत्नी (या पति, यदि कर्मचारी महिला थी) को नौकरी पाने का प्रथम अधिकार होता है। यदि पत्नी नियुक्ति नहीं लेना चाहती या पात्र नहीं है, तो वह अपना अधिकार त्यागकर अपने पुत्र या पुत्री में से किसी एक को नौकरी के लिए सिफारिश कर सकती है। आश्रित की परिभाषा में पति/पत्नी, पुत्र, अविवाहित/विधवा पुत्री, दत्तक पुत्र आदि शामिल हैं। विवाहित पुत्री को भी पहले के संशोधनों से पात्रता मिल चुकी है। 

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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