स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। विद्यार्थियों के लिए न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न ही उपयोग योग्य शौचालय। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जून तक पूरा होना था काम, अब तक सिर्फ 40 प्रतिशत निर्माण
जानकारी के अनुसार, स्कूल भवन के तीन जर्जर कमरों के नवीनीकरण का कार्य फरवरी 2026 में एक निर्माण एजेंसी को सौंपा गया था। विभाग ने जून के अंत तक कार्य पूरा करने की समय सीमा तय की थी, लेकिन जुलाई तक भी निर्माण कार्य केवल 40 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। ठेकेदार की धीमी कार्यप्रणाली के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हेडमास्टर बोले- ठेकेदार की लापरवाही से बिगड़ी व्यवस्था
स्कूल के हेडमास्टर मुकेश ने बताया कि विद्यालय में 99 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। तीन कमरों की मरम्मत का कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण आठों कक्षाओं की पढ़ाई एक ही ऑफिस रूम में करानी पड़ रही है। इससे शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो गया है।
चार महीने तक दूसरे स्कूल में पढ़े बच्चे
डेगाना के पीईईओ जानकी देवी ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए फरवरी में मरम्मत कार्य शुरू कराया गया था। पिछले चार महीने तक विद्यार्थियों को करीब एक किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेगाना में पढ़ाई के लिए भेजा गया। अब बच्चों को वापस स्कूल लाया गया है, लेकिन भवन तैयार नहीं होने के कारण एक ही कमरे में सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप
डेगाना उच्च माध्यमिक विद्यालय के पीईईओ सुरेश लोमरोड ने बताया कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो सका है। ठेकेदार की लापरवाही के कारण अब तक केवल लगभग 40 प्रतिशत काम ही हुआ है। विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी
स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए, स्कूल में पेयजल और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
विभाग ने सुधार का दिया आश्वासन
पीईईओ जानकी देवी ने कहा कि विद्यालय का निरीक्षण कर पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही निर्माण कार्य को भी जल्द पूरा कराने के लिए संबंधित एजेंसी को निर्देश दिए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को जल्द सामान्य माहौल में पढ़ाई की सुविधा मिल सके।