सुरेश ढाका की फरारी के दौरान ही उसके पिता मांगीलाल ढाका की फर्म ढाका कंस्ट्रक्शन को करीब 20.05 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली पर बजरी खनन का ठेका मिला था। इस खदान पर करीब दो महीने पहले ही खनन कार्य शुरू हुआ है और बड़ी मात्रा में बजरी का स्टॉक भी किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद शर्मा के नेतृत्व में SOG की टीम ने खनन स्थल पर पहुंचकर दस्तावेजों और गतिविधियों की जांच की। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कारोबार में ढाका परिवार के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कहीं पेपर लीक से अर्जित धन को खनन व्यवसाय में निवेश तो नहीं किया गया।
2024 में मिला ठेका, 2025 में जारी हुआ खनन पट्टा
ब्यावर जिले के रायपुर क्षेत्र स्थित गिरी नंदा बांध के पास मेसिया गांव की करीब 100 हेक्टेयर भूमि पर बजरी खनन के लिए फरवरी 2024 में ई-ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की गई थी। जुलाई 2024 में 40 लाख रुपए की आरक्षित दर पर ई-निविदा आमंत्रित की गई, जिसमें ढाका कंस्ट्रक्शन ने 20.05 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगाई।
इसके बाद अगस्त 2024 में खान विभाग ने फर्म को मंशा पत्र जारी किया और लगभग डेढ़ साल बाद दिसंबर 2025 में पांच वर्षों के लिए खनन पट्टा स्वीकृत कर दिया। खनन शुरू होने की सूचना के बाद क्षेत्र के करीब 10 गांवों के ग्रामीणों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया।
चार साल से फरार, एक लाख का इनाम
सुरेश ढाका वर्ष 2022 में सामने आए वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद से फरार है। बाद में उसका नाम सब-इंस्पेक्टर (SI), JEN सहित कुल 10 भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामलों में सामने आया। राज्य सरकार ने उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया हुआ है।
हाल ही में 3 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कराया गया है, ताकि उसके विदेश भागने की संभावना पर रोक लगाई जा सके।
साधारण परिवार से बना कथित मास्टरमाइंड
जालोर जिले के सांचौर क्षेत्र के अचलपुर गांव निवासी सुरेश ढाका ने आठवीं तक की पढ़ाई गांव में, जबकि दसवीं-बारहवीं जालोर से की। इसके बाद उसने जोधपुर से स्नातक और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। उसके साथ पढ़ने वाले लोगों के अनुसार, छात्र जीवन में उसके पास कई बार बस का किराया तक नहीं होता था और दोस्त उसकी मदद करते थे।
मुंबई में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा नाम
पढ़ाई के बाद सुरेश अपने मामा के साथ मुंबई गया, जहां उसने ट्रेडिंग का कारोबार शुरू किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह हवाला के जरिए विदेशों से धन मंगाने और उसे कन्वर्ट करने के काम में भी शामिल रहा। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान उसका नाम सामने आने पर वह वर्ष 2016 में मुंबई छोड़कर जयपुर आ गया।
यूथ कांग्रेस की वेबसाइट हैक करने का भी आरोप
वर्ष 2019 में यूथ कांग्रेस के ऑनलाइन चुनाव के दौरान सुरेश पर वेबसाइट हैक करने का आरोप भी लगा था। आरोप है कि उसने कुछ नेताओं से संपर्क कर चुनाव जिताने के बदले लाखों रुपए की मांग की थी। मामला सामने आने के बाद चुनाव प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी।
जून 2022 से शुरू हुई थी पेपर लीक की साजिश
जांच में सामने आया कि सुरेश ढाका, सुरेश बिश्नोई और भूपेंद्र सारण ने ग्रेड सेकेंड भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करने की योजना जून 2022 से ही बना ली थी। पेपर हल कराने के लिए शिक्षकों और MBBS डॉक्टरों को लाखों रुपए का लालच दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पेपर सॉल्व करने वालों को 10-10 लाख रुपए तक एडवांस दिए गए थे।
अब SOG और ED दोनों एजेंसियां सुरेश ढाका के आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और निवेश की गहन जांच कर रही हैं। खनन कारोबार में हुए निवेश और उसके स्रोत की जांच इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।