झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद पिपलोद गांव के किसान ने स्कूल के लिए छोड़ा पक्का घर, परिवार संग अपनाई झोपड़ी.

पिपलोद गांव में एक हादसा, जिसने सबको झकझोर दिया। स्कूल की जर्जर इमारत ढहने से सात मासूमों की जान चली गई। लेकिन इस अंधेरे में एक किसान की कहानी ने रोशनी बिखेरी। मोर सिंह ने अपने पक्के घर को बच्चों की पढ़ाई के लिए दान कर दिया और खुद परिवार संग झोपड़ी में चले गए। क्या गांव के बच्चे अब फिर से सपने देख पाएंगे? उनकी यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देगी।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 19, 2025 • 11:16 AM  29
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद पिपलोद गांव के किसान ने स्कूल के लिए छोड़ा पक्का घर, परिवार संग अपनाई झोपड़ी.
“झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद पिपलोद गांव के किसान ने स्कूल के लिए छोड़ा पक्का घर, परिवार संग अपनाई झोपड़ी.”
Favicon
Read more on thekhatak.com
19 Aug 2025
https://thekhatak.com/jhalawar-school-tragedy-piplod-farmer-donates-house-family-lives-in-hut
Google News
Copied
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद पिपलोद गांव के किसान ने स्कूल के लिए छोड़ा पक्का घर, परिवार संग अपनाई झोपड़ी.

झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक साधारण किसान की असाधारण कहानी ने न केवल गांव, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रेरणा दी है। मोर सिंह, एक गरीब किसान, ने अपने पुश्तैनी पक्के मकान को गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया और खुद अपने आठ सदस्यों वाले परिवार के साथ खेत के पास तिरपाल और लकड़ी से बनी एक साधारण झोपड़ी में रहने लगे। यह बलिदान उन्होंने तब किया, जब 25 जुलाई 2025 को पिपलोदी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत ढहने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई और 28 अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया, और स्कूल की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।

हादसे ने उजागर की व्यवस्था की नाकामी

25 जुलाई की सुबह, जब पिपलोदी गांव के स्कूल में बच्चे प्रार्थना के लिए जमा हुए थे, बारिश के कारण जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। इस हादसे में सात बच्चों की मौत हो गई, और कई अन्य मलबे में दबकर घायल हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन कई सालों से जर्जर था, और इसकी मरम्मत के लिए कई बार शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका मीना गर्ग सहित पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया, और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक परिजन को संविदा पर नौकरी देने की घोषणा की। लेकिन गांव में बच्चों की पढ़ाई का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में फंस गया।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter