सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील अंतर्गत बसंतगढ़ गांव में गुरुवार रात एक बड़े तेंदुए (लेपर्ड) ने दुकान से घर लौट रहे 25 वर्षीय युवक पर अचानक हमला बोल दिया। हमले में युवक की गर्दन को जबड़े में कसकर दबोच लिया गया और उसे कुछ दूरी तक घसीटा गया। युवक की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े तो लेपर्ड उसे छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। यह घटना क्षेत्र में पहले से मौजूद लेपर्ड के खतरे को एक बार फिर उजागर करती है, जहां पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
बसंतगढ़ निवासी पुनाराम पुत्र हुसा राम (25 वर्ष) गुरुवार रात लगभग 9 बजे अपनी दुकान से घर की ओर पैदल जा रहे थे। अंधेरे का फायदा उठाकर लेपर्ड ने पीछे से अचानक उन पर झपट्टा मारा। लेपर्ड ने अपनी मजबूत जबड़ों से पुनाराम की गर्दन को कसकर पकड़ लिया और उन्हें घसीटने लगा। युवक ने जोर-जोर से चीखना शुरू किया, जिसकी आवाज सुनकर आस-पास के कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों की आवाजें और भीड़ बढ़ने पर लेपर्ड ने युवक को थोड़ी दूर तक घसीटने के बाद छोड़ दिया और तेजी से जंगल में गायब हो गया।
युवक की हालत गंभीर
हमले में पुनाराम गंभीर रूप से घायल हो गए। लेपर्ड के दांतों से उनकी गर्दन पर गहरे घाव हो गए हैं, जिसमें गले की नसों को भी गंभीर चोट पहुंची है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि घावों से लगातार खून बह रहा था। तुरंत उन्हें पिंडवाड़ा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद 108 एम्बुलेंस से सिरोही ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।
ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि घाव बहुत गहरे हैं और गले की प्रमुख नसों में चोट के कारण खून का बहाव नहीं रुक रहा है। उनकी हालत चिंताजनक बताई गई, जिसके चलते उन्हें तत्काल उच्च स्तरीय इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी सर्जन की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा जान को खतरा हो सकता है।
क्षेत्र में लेपर्ड का लगातार खतरा
यह पहली घटना नहीं है जब बसंतगढ़ और आसपास के वन क्षेत्र में लेपर्ड ने इंसानों पर हमला किया हो। करीब 8 महीने पहले इसी क्षेत्र में एक अन्य युवक पर लेपर्ड ने हमला किया था, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके अलावा भी इस इलाके में लेपर्ड द्वारा लोगों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गांव बसंतगढ़ सटे हुए घने वन क्षेत्र के कारण तेंदुओं का आवागमन आम है, लेकिन इंसानी बस्तियों के नजदीक आने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
ग्रामीणों में इस हमले के बाद दहशत का माहौल है। लोग शाम ढलते ही घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। वन विभाग को इस घटना की सूचना मिल चुकी है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की जानकारी नहीं आई है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि वन विभाग लेपर्ड को कैद करने या क्षेत्र से हटाने के लिए तुरंत कदम उठाए, ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।