61 लाख वोटरों पर लटकी तलवार: बिहार में मतदाता सूची विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान

बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विवाद, 61 लाख नाम हटने की आशंका से महागठबंधन और NDA में तनाव। तेजस्वी यादव ने दी चुनाव बहिष्कार की धमकी, कांग्रेस सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेगी।

Web Desk
Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 25, 2025 • 11:41 AM  93
र
राजनीति
NEWS CARD
Logo
61 लाख वोटरों पर लटकी तलवार: बिहार में मतदाता सूची विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान
“61 लाख वोटरों पर लटकी तलवार: बिहार में मतदाता सूची विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान”
Favicon
Read more onthekhatak.com
25 Jul 2025
https://thekhatak.com/sword-hanging-over-61-lakh-voters-voter-list-controversy-raises-political-temperature-in-bihar
Google News
Copied
61 लाख वोटरों पर लटकी तलवार: बिहार में मतदाता सूची विवाद ने बढ़ाया सियासी तापमान

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के तहत करीब 61 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जिसमें 21.6 लाख मृत मतदाता, 31.5 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग और 7 लाख दोहरे रजिस्ट्रेशन वाले मतदाता शामिल हैं। इस खबर ने सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी महागठबंधन के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने तो इस प्रक्रिया को "लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए चुनाव बहिष्कार की धमकी तक दे दी है।

2020 में कितना नजदीकी था मुकाबला?

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के आंकड़े इस विवाद की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। उस चुनाव में 8 सीटों पर जीत-हार का अंतर 1,000 वोटों से भी कम था, जबकि 11 सीटों पर यह फासला 2,000 वोटों से कम रहा। कुल 85 सीटों पर विजेता और पराजित उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर 10,000 से कम था। उदाहरण के लिए:

इन आंकड़ों से साफ है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए गए, तो इसका 2025 के चुनाव पर गहरा असर पड़ सकता है। खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला पहले से ही बेहद करीबी रहा है।

महागठबंधन का विरोध: "लोकतंत्र पर हमला"

महागठबंधन, जिसमें RJD, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं, ने इस प्रक्रिया को "वोटरों के अधिकारों की चोरी" करार दिया है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया खासकर गरीब, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा, "संविधान ने हर नागरिक को वोट का अधिकार दिया है, लेकिन यह प्रक्रिया लाखों लोगों को इससे वंचित कर सकती है।"

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मनमाने तरीके से गणना पत्र भर रहे हैं और फर्जी दस्तखत कर रहे हैं। AICC के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने कहा, "हम इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीति बनाएंगे।" संसद के बाहर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विरोध प्रदर्शन किया, जहां उनके बैनर पर 'लोकतंत्र' की स्पेलिंग गलत होने पर बीजेपी ने तंज कसा।

RJD ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का फैसला किया है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, "मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे, जबकि यह बिहार के लोकतंत्र का सवाल है।"

NDA का जवाब: "विपक्ष का हार का डर"

दूसरी ओर, NDA ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और जरूरी बताया है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "विपक्ष को हार का डर सता रहा है, इसलिए वे इस प्रक्रिया को साजिश बता रहे हैं। SIR का मकसद फर्जी मतदाताओं को हटाना है, ताकि स्वच्छ और निष्पक्ष चुनाव हो सके।"

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया कि बिहार में NDA शासन के दौरान विस्थापन कम हुआ है और केवल 2-3% लोग ही राज्य से बाहर गए हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "यह प्रक्रिया संवैधानिक है और हर बार की तरह इस बार भी निष्पक्ष होगी।"

चुनाव आयोग का पक्ष: "पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता"

चुनाव आयोग ने इस विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। आयोग के मुताबिक, 99% मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है, और 7.21 करोड़ (91.32%) मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा हो चुके हैं। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया कि बुजुर्गों, विकलांगों और कमजोर वर्गों को परेशान नहीं किया जाएगा।

आयोग के एक बयान में कहा गया, "हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 1 अगस्त, 2025 को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में कोई अयोग्य नाम न रहे।" इसके लिए 1 लाख BLO, 4 लाख स्वयंसेवक और 1.5 लाख BLA घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं।

संभावित असर: करीबी सीटों पर खतरा

2020 के चुनाव में 153 सीटों पर जीत-हार का अंतर 20,000 वोटों से कम था, और 32 सीटों पर यह 5,000 वोटों से भी कम था। अगर 61 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, तो इसका सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर होगा जहां मुकाबला पहले से ही कांटे का रहा है। उदाहरण के लिए, हिलसा में 12 वोटों और बारबीघा में 113 वोटों का अंतर इस बात का संकेत है कि मामूली बदलाव भी नतीजों को पलट सकता है।

विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया उनके वोट बैंक को कमजोर कर सकती है, खासकर ग्रामीण और गरीब इलाकों में, जहां दस्तावेजों की कमी एक बड़ी समस्या है। वहीं, NDA का कहना है कि यह प्रक्रिया सभी के लिए समान है और इसका मकसद केवल फर्जी वोटिंग को रोकना है।

कांग्रेस की रणनीति: सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि BLO द्वारा अवैध वसूली और धमकियों की शिकायतें मिल रही हैं। राहुल गांधी ने संसद में कहा, "चुनाव आयोग अगर इस तरह काम करेगा, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।"

पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है, ताकि मतदाताओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया जा सके। साथ ही, इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति तैयार की जा रही है।

बिहार में मतदाता सूची का यह विवाद न केवल 2025 के विधानसभा चुनाव को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह लोकतंत्र की पारदर्शिता पर भी सवाल उठा रहा है। विपक्ष इसे सत्ताधारी दल की साजिश बता रहा है, जबकि NDA और चुनाव आयोग इसे जरूरी सुधार बता रहे हैं। इस बीच, आम मतदाता असमंजस में है कि उनका वोट सुरक्षित रहेगा या नहीं। जैसे-जैसे 1 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख नजदीक आ रही है, बिहार की सियासत और गर्म होने वाली है।

Web Desk

Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor

Web Desk The Khatak

Digital Archives

homeHomeamp_storiesWeb Storieslocal_fire_departmentTrendingplay_circleVideosmark_email_unreadNewsletter