मतदाता सत्यापन हुआ आसान, दस्तावेज़ दिखाने से मिली छूट
चुनाव आयोग ने घोषणा की कि विशेष गहन संशोधन (SIR) में ज्यादातर मतदाताओं को नया दस्तावेज नहीं देना होगा, क्योंकि उनके नाम पहले की मतदाता सूची में हैं। नए वोटरों और स्थानांतरित लोगों को डिक्लेरेशन फॉर्म के साथ निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।
चुनाव आयोग ने बुधवार को घोषणा की कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत देश के अधिकांश राज्यों में आधे से ज्यादा मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई नया दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इसका कारण यह है कि इन मतदाताओं के नाम पहले से ही पिछली SIR की मतदाता सूची में दर्ज हैं। यह कदम मतदाता सूची को अपडेट करने और नए वोटरों को जोड़ने की प्रक्रिया को और सरल बनाने की दिशा में उठाया गया है।
बिहार में 60% मतदाताओं को राहत, नए नियमों का पालन जरूरी
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न राज्यों में पिछली SIR प्रक्रिया अलग-अलग वर्षों में आयोजित की गई थी, जो ज्यादातर 2002 से 2004 के बीच पूरी हो चुकी थी। उदाहरण के लिए, बिहार में 2003 की SIR सूची को आधार बनाया गया है। वहां के करीब 5 करोड़ मतदाता, यानी 60% वोटर, पहले से ही इस सूची में शामिल हैं। ऐसे मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, बाकी 3 करोड़ नए मतदाताओं (40%) को 11 स्वीकृत दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आधार कार्ड को भी 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है।
दिल्ली और उत्तराखंड की SIR सूचियां ऑनलाइन उपलब्ध
चुनाव आयोग ने बताया कि दिल्ली में 2008 और उत्तराखंड में 2006 की SIR सूची को आधार बनाया गया है। ये सूचियां अब संबंधित राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। नए मतदाताओं या दूसरे राज्यों से स्थानांतरित हुए लोगों को एक डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा, जिसमें उन्हें अपने जन्म के बारे में जानकारी देनी होगी। नियम इस प्रकार हैं: