पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े महिला अस्पताल पर फिर सवाल, पाक विस्थापितों ने लगाए इलाज में देरी के आरोप

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल पर दो पाकिस्तानी विस्थापित मरीजों के परिजनों ने इलाज में देरी और सरकारी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। रहमता और गोरी के मामलों में वीजा समाप्त होने के कारण इलाज में बाधा आई। अस्पताल अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना ने दावा किया कि इलाज से इनकार नहीं किया जाता, लेकिन गैर-भारतीयों को सरकारी सहायता सीमित है। मामला स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर सवाल उठाता है।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
June 1, 2025 • 7:14 PM  511
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पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े महिला अस्पताल पर फिर सवाल, पाक विस्थापितों ने लगाए इलाज में देरी के आरोप
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पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े महिला अस्पताल पर फिर सवाल, पाक विस्थापितों ने लगाए इलाज में देरी के आरोप

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल, जो पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा महिला अस्पताल है, एक बार फिर विवादों के घेरे में है। दो पाकिस्तानी विस्थापित मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और देरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। जैसलमेर से रेफर की गई मरीज रहमता और दूसरी मरीज गोरी के परिजनों का दावा है कि उन्हें समय पर उचित इलाज या सरकारी सुविधाएं नहीं मिलीं। इन आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि अस्पताल अधीक्षक ने इन दावों का खंडन करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

मरीजों के परिजनों के आरोप

रहमता के परिजनों का कहना है कि उन्हें अस्पताल में मुफ्त सुविधाएं या सरकारी जांच का लाभ नहीं मिला। उनके पति ने बताया कि वीजा समाप्त होने का हवाला देकर उनकी पत्नी का इलाज शुरू नहीं किया गया। तीन दिन की देरी के बाद, अस्पताल अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ही जांच और इलाज शुरू हो सका। अब रहमता का ऑपरेशन होने की बात कही जा रही है।वहीं, गोरी के रिश्तेदारों ने बताया कि नसबंदी के लिए भर्ती होने के बावजूद उनका ऑपरेशन नहीं किया गया। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और बाद में आने को कहा गया। परिजनों का कहना है कि इस देरी से उनकी परेशानी बढ़ गई है।

अस्पताल अधीक्षक का पक्ष

उम्मेद अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मरीजों की नागरिकता उनके लिए मायने नहीं रखती। भारतीय नागरिकों को सरकारी नीतियों के तहत मुफ्त इलाज मिलता है, लेकिन गैर-भारतीय नागरिकों के लिए ऐसी सुविधाएं सीमित हैं। रहमता के मामले में उन्होंने बताया कि उसकी दो बार प्री-डिलीवरी हो चुकी है, और अब उसका ऑपरेशन तय है। हालांकि, वीजा समाप्त होने के कारण उसे सरकारी सहायता नहीं दी जा रही। गोरी के मामले में, डॉ. मकवाना ने बताया कि उनकी हीमोग्लोबिन की कमी के कारण ऑपरेशन में देरी हुई है। उन्हें दवाइयां दी गई हैं और 15 तारीख को दोबारा बुलाया गया है, जब उनकी जांच के बाद ऑपरेशन होगा।

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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