कौन थे Pingali Venkayya? जानिए भारत के पहले राष्ट्रीय ध्वज की कहानी

पिंगली वेंकैया की 149वीं जयंती पर देश ने तिरंगे के रचयिता को श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने तिरंगे को भारत की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक बताया।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 2, 2025 • 12:13 PM  47
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2 Aug 2025
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कौन थे Pingali Venkayya? जानिए भारत के पहले राष्ट्रीय ध्वज की कहानी

2 अगस्त, 2025 को भारत ने अपने राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक और स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की 149वीं जन्म जयंती मनाई। इस अवसर पर देश भर के नेताओं, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, उनके योगदान को याद करते हुए तिरंगे को भारत की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक बताया। पिंगली वेंकैया, जिन्हें 'झंडा वेंकैया' के नाम से भी जाना जाता है, ने न केवल तिरंगे का डिज़ाइन तैयार किया, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पिंगली वेंकैया: एक बहुआयामी व्यक्तित्व

पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त, 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के निकट भटलापेनुमारु में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम हनुमंतरायुडु और माता का नाम वेंकटरत्नम्मा था। वेंकैया एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ शिक्षाविद, लेखक, भूविज्ञानी, कृषि वैज्ञानिक और भाषाविद् भी थे। उन्होंने जापानी और उर्दू जैसी भाषाओं में महारत हासिल की थी, जिसके कारण उन्हें 'जापान वेंकैया' भी कहा जाता था। इसके अलावा, कपास की खेती पर उनके शोध के लिए उन्हें 'पट्टी वेंकैया' और हीरे की खदानों पर विशेषज्ञता के लिए 'डायमंड वेंकैया' के नाम से भी जाना गया।

वेंकैया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मछलीपट्टनम में पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी गए। 19 वर्ष की उम्र में उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल होकर दक्षिण अफ्रीका में बोअर युद्ध (1899-1902) में हिस्सा लिया। यहीं उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई, जिनके विचारों ने उन्हें गहरे रूप से प्रभावित किया। इस मुलाकात ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी, और उन्होंने भारत के लिए एक राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यकता को महसूस किया।

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