अजमेर के छोटे गांव से बड़ी सफलता! बाल विवाह रोककर बेटियां आगे बढ़ीं....
राजस्थान के अजमेर जिले के हासियावास गांव (जहां पहले बाल विवाह आम था और बेटियां पढ़ाई छोड़ देती थीं) की दो बेटियां सपना गुर्जर और मोनिका गुर्जर ने फुटबॉल खेलते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया। परिवार के सहयोग से पढ़ाई जारी रखी और मेहनत से सरकारी नौकरी हासिल की — सपना पटवारी (ब्यावर जिले में नियुक्त) और मोनिका स्टेनोग्राफर (मसूदा, ब्यावर में कार्यरत) बनीं। गांव में अब 100+ बेटियां फुटबॉल खेल रही हैं, जो रूढ़िवादिता के खिलाफ प्रेरणादायक बदलाव की मिसाल है। मां किसनी देवी का संदेश: पहले पढ़ाई, फिर विवाह।
अजमेर: जहां बाल विवाह आम, उस गांव की बेटियां बनीं 'सरकारी अफसर', पटवारी सपना और स्टेनोग्राफर मोनिका की प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरी राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित छोटा सा गांव हासियावास (अजमेर से लगभग 35 किलोमीटर दूर) पहले बाल विवाह की वजह से कुख्यात था। यहां की अधिकांश बेटियां कम उम्र में शादी के बंधन में बंध जाती थीं और पढ़ाई बीच में छोड़ देती थीं। लेकिन अब यह गांव बदलाव की मिसाल बन चुका है। यहां की बेटियों ने न केवल फुटबॉल के मैदान पर कमाल दिखाया, बल्कि पढ़ाई और मेहनत से सरकारी नौकरियां हासिल कर रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी है।खास तौर पर दो बेटियों सपना गुर्जर और मोनिका गुर्जर की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। ये दोनों लड़कियां हासियावास गांव की रहने वाली हैं और गुर्जर परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने फुटबॉल खेलते हुए अपनी पहचान बनाई और बाद में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर सरकारी पदों पर पहुंच गईं।
सपना गुर्जर की सफलता
सपना गुर्जर ने स्कूली स्तर पर फुटबॉल में राज्य स्तर पर टॉप किया और कई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाई। परिवार के सहयोग से उन्होंने खेल के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पटवारी भर्ती परीक्षा में चयनित हुईं। अब उनकी नियुक्ति ब्यावर जिले में पटवारी के पद पर हो चुकी है। सपना बताती हैं कि परिवार का पूरा साथ मिला, जिसकी वजह से वे फुटबॉल खेल सकीं और आगे बढ़ सकीं।